रामपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दुश्मन देश पाकिस्तान का नागरिक यहां आया, फर्जी पहचान पत्र बनवाया और अपनी पैतृक जमीन बेचकर वापस चला गया।
जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2014 में यह पाकिस्तानी नागरिक 90 दिन के टूरिस्ट वीजा पर रामपुर पहुंचा। 29 जनवरी को उसने किशनपुर अटरिया स्थित अपनी जमीन सिर्फ 5 लाख रुपये में बेच दी। जबकि नियमानुसार यह जमीन कस्टोडियन की होनी चाहिए थी, क्योंकि वह व्यक्ति 1992-93 में पाकिस्तान चला गया था और वहां की नागरिकता ले चुका था। अप्रैल में वह आराम से पाकिस्तान लौट गया।
बाद में जमीन के साझेदारों में विवाद हुआ और रीसेल के लिए डाक्यूमेंट तैयार किए जाने लगे, तभी यह पूरा खेल उजागर हुआ। शिकायत अब गृह मंत्रालय तक पहुंच गई है और जांच में आरोप सही पाए गए तो रजिस्ट्री शून्य घोषित की जा सकती है।
बड़ा सवाल उठता है
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रजिस्ट्री में मोहल्ला चाह शोर, तहसील सदर जिला रामपुर का पता कैसे दर्ज हुआ?
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आखिर फर्जी पहचान पत्र और आधार कार्ड किसने बनवाया?
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रजिस्ट्री ऑफिस ने जांच और सत्यापन क्यों नहीं किया?
खुफिया एजेंसियां भी चकमा खा गईं
पाकिस्तानी नागरिक जनवरी 2014 से अप्रैल 2014 तक यहां रहा और जमीन बेच दी, लेकिन खुफिया तंत्र को भनक तक नहीं लगी। वह जनवरी 2015 में फिर आया और बकाया रकम लेकर वापस चला गया।
दोनों देशों में छिपाई जानकारी
शिकायतकर्ता का कहना है कि उस व्यक्ति ने पाकिस्तान जाकर नागरिकता ली और यहां आकर जमीन बेच दी। पासपोर्ट पर जन्म स्थान कराची दर्ज है, लेकिन दोनों देशों में यह जानकारी छुपाई गई।
सामाजिक कार्यकर्ता की मांग
सोशल एक्टिविस्ट दानिश खान ने गृह मंत्रालय को शिकायत भेजी है। उनके मुताबिक यह जमीन कस्टोडियन की है और इसे तुरंत शत्रु संपत्ति घोषित कर बैनामा शून्य किया जाना चाहिए। साथ ही इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अधिकारियों का बयान
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डीजीसी (रेवन्यू) प्रेम किशोर पांडेय का कहना है कि रामपुर के कई लोग पाकिस्तान जाकर नागरिकता ले चुके हैं, जिनकी जमीन शत्रु संपत्ति घोषित होनी चाहिए थी। अब यह जांच का विषय है कि परिजनों ने प्रशासन से जानकारी क्यों छुपाई।
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डीएम जोगिन्दर सिंह ने कहा कि यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर शिकायत आती है तो नियमानुसार जांच और कार्रवाई की जाएगी।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
