बॉलीवुड एक्टर ज़ायद खान और सुज़ैन ख़ान की मां जरीन खान का अंतिम संस्कार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। अंतिम यात्रा की तस्वीरों और वीडियोज़ में ज़ायद के हाथ में मटकी दिखाई दी, माथे पर चंदन भी लगा था और पास में पंडित भी नज़र आए। ये नज़ारे देखकर कई लोग कन्फ्यूज़ हो गए कि क्या जरीन का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से हुआ?
जरीन खान, संजय ख़ान की पत्नी और ज़ायद व सुज़ैन की मां, अब इस दुनिया में नहीं रहीं। 81 साल की जरीन लंबे समय से बीमार थीं। शुक्रवार सुबह (मुंबई में) उनके घर पर ही उनका निधन हुआ। ख़बर फैलते ही परिवार के करीबी और बॉलीवुड से जुड़ी कई हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। रितिक रोशन और सबा आज़ाद समेत कई सितारे दिखाई दिए। संजय ख़ान और बेटे ज़ायद ने अंतिम संस्कार की रस्मों में हिस्सा लिया। सूर्यास्त से पहले अंतिम संस्कार पूरा कर दिया गया। इसी दौरान सामने आई तस्वीरों में ज़ायद के हाथ में मटकी और गले में जनेऊ दिखा, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के सवाल उठने लगे।
ज़ायद के हाथ में मटकी, माथे पर चंदन—लोग बोले, “ये तो हिंदू रीति है”
वायरल क्लिप्स में ज़ायद हाथ में मटकी लिए नज़र आए। उनके गले में जनेऊ था और माथे पर चंदन लगा दिखा। आमतौर पर हिंदू परंपराओं में अंतिम संस्कार के दौरान ऐसी रस्में निभाई जाती हैं, इसलिए यूज़र्स कन्फ्यूज़ हो गए कि मुस्लिम परिवार होते हुए भी हिंदू रिवाज क्यों अपनाए गए? क्लिप्स में पंडित भी मौजूद नज़र आए और श्मशान घाट भी हिंदू रीति से अंतिम संस्कार वाला बताया गया।
“हिंदू या मुस्लिम?”—टिप्पणियों की बाढ़
फोटोग्राफ़र विरल भैयानी के इंस्टाग्राम पोस्ट पर लोगों ने ढेरों रिएक्शन दिए। किसी ने पूछा, “क्या वो हिंदू थीं?” किसी ने लिखा, “मुस्लिम होते हुए हिंदू रिवाज क्यों?” एक यूज़र ने कमेंट किया, “खान में हिंदू भी होता है क्या?” तो किसी ने लिखा, “बहुत दुखद, पर जनेऊ क्यों पहना है?” इन सवालों के बीच कुछ लोगों ने इसे परिवार की निजी पसंद बताते हुए कहा, “इससे क्या फ़र्क पड़ता है, उनकी पर्सनल चॉइस होगी।”
पारसी पृष्ठभूमि, मुस्लिम परिवार—दोनों परंपराओं का मान
जानकारी के मुताबिक, संजय ख़ान मुस्लिम हैं और जरीन हिंदू नहीं, बल्कि पारसी थीं। ऐसे में परिवार लंबे समय से हिंदू-मुस्लिम—दोनों परंपराओं का सम्मान करता आया है। यही वजह मानी जा रही है कि जरीन के अंतिम संस्कार में हिंदू रीति-रिवाज से जुड़ी रस्में भी दिखाई दीं। सोशल मीडिया पर भले सवाल उठे हों, लेकिन परिवार ने अपने मुताबिक़ और अपनी मान्यताओं के अनुसार अंतिम विदाई दी।
अंतिम यात्रा की झलकियां और परिवार का साइलेंट ग्रिफ़
अंतिम यात्रा की तस्वीरों में परिवार शोक में डूबा दिखाई दिया। ज़ायद ने रस्मों को शांतिपूर्वक निभाया, जबकि संजय ख़ान पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। बॉलीवुड के कई दोस्तों ने चुपचाप पहुंचकर श्रद्धांजलि दी और परिवार को हौसला दिया। वीडियो और फ़ोटो वायरल होते ही चर्चा का फोकस रस्मों पर चला गया, लेकिन परिवार के लिए ये बेहद निजी और भावुक पल था।
नतीजा: परंपराएं, पहचान और निजी पसंद
जरीन खान के अंतिम संस्कार में दिखी रस्मों को लेकर बहस ज़रूर छिड़ी, लेकिन बहुत-से यूज़र्स ने यही कहा कि किसी भी परिवार को अपनी मान्यताओं के हिसाब से विदाई देने का अधिकार है। जरीन के लिए परिवार ने जो उचित समझा, उसी तरह उन्हें अंतिम विदाई दी। यही बात इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील और सम्मानजनक पक्ष भी है।








