Final में 52 रन से हार, फिर भी Wolvaardt का शतक; क्यों बोलीं—“टीम पर गर्व”

Final में 52 रन से हार, फिर भी Wolvaardt का शतक; क्यों बोलीं—“टीम पर गर्व”

ICC Women’s World Cup 2025 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को नवी मुंबई में भारत से 52 रन की हार मिली, लेकिन कप्तान लॉरा वोल्वार्ड्ट (Laura Wolvaardt) ने टीम की पूरी यात्रा पर गर्व जताया। सेमीफाइनल के 169 रन के बाद वोल्वार्ड्ट ने निर्णायक मुकाबले में भी 98 गेंदों पर 101 रन ठोके, फिर भी 299 के लक्ष्य का पीछा करते हुए उनकी टीम 45.3 ओवर में 246 पर सिमट गई। भारत के लिए दीप्ति शर्मा ने 39 रन देकर 5 विकेट लिए, जबकि शैफाली वर्मा ने 36 रन देकर 2 विकेट चटकाए—और दोनों ने इससे पहले बल्लेबाज़ी में अर्धशतक भी लगाए थे।

दक्षिण अफ्रीका की पारी की शुरुआत उम्मीद भरी रही, क्योंकि कप्तान खुद लय में दिखीं और स्ट्राइक रोटेशन के साथ बाउंड्री भी निकलीं। लेकिन बीच-बीच में विकेट गिरते रहे, जिससे रनचेज़ की रफ्तार टूटती-बनती रही। अंतिम स्कोरबोर्ड 246/10 (45.3 ओवर) पर थमा और 52 रन की दूरी अपार रह गई। दूसरी ओर, भारत की पारी में शैफाली वर्मा (87) और स्मृति मंधाना (45) की तेज शुरुआत ने मेजबानों को 300 के करीब पहुंचाने की नींव रखी। फिर भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा—दीप्ति के ‘फाइव-फॉर’ ने मैच का रुख पकड़े रखा।

हार के बावजूद वोल्वार्ड्ट ने टीम के हौसले और वापसी की क्षमता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “इस अभियान के लिए मैं इस टीम पर इससे ज़्यादा गर्व नहीं कर सकती। हमने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन क्रिकेट खेला, आज भारत ने हमसे बेहतर खेल दिखाया। हार निराशाजनक है, लेकिन हम इससे सीखकर और मज़बूत बनेंगे।”

वास्तव में दक्षिण अफ्रीका की यह मोहिम ‘हाई-लो’ से भरी रही—इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 69 और 97 पर ऑलआउट होने जैसी भारी हारें भी आईं, तो ग्रुप स्टेज में भारत पर शानदार जीत और सेमीफाइनल में नैट स्किवर-ब्रंट की इंग्लैंड टीम को हराने जैसी बड़ी सफलताएं भी मिलीं। कप्तान ने इसी उतार-चढ़ाव में टीम की दृढ़ता को सबसे बड़ी उपलब्धि बताया: “हमने खराब मैचों को पीछे छोड़ने का काम शानदार तरीके से किया। हम या तो बहुत अच्छे थे या बहुत खराब, लेकिन शुक्र है कि अच्छा ज़्यादा निकला। कई खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट कमाल का रहा—टीम की रेज़िलिएंस पर गर्व है।”

वोल्वार्ड्ट ने इस विश्व कप में 571 रन बनाए—यह सिर्फ इस संस्करण का ही नहीं, महिला वनडे विश्व कप इतिहास का भी सर्वाधिक व्यक्तिगत रन-योग है। उन्होंने 2022 में एलिसा हीली के 509 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। सेमीफाइनल में उनका 169 रन इस टूर्नामेंट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर भी रहा। कप्तान ने बताया कि बल्लेबाज़ और कप्तान की भूमिकाओं को अलग-अलग रखने से उन्हें अपने नैचुरल गेम खेलने की आज़ादी मिली: “विश्व कप से पहले मेरा साल बहुत अच्छा नहीं गया और शुरुआत भी धीमी रही। ज़्यादा सोचने से नुकसान हुआ। खुद को समझाया कि यह बस एक और क्रिकेट मैच है—जब मैंने दोनों भूमिकाओं को अलग किया, तो शॉट्स नैचुरल निकले और कप्तानी पर अलग समय में फोकस कर पाई।”

मैच पर लौटते हुए वोल्वार्ड्ट ने माना कि टॉस के बाद पहले गेंदबाज़ी का फैसला पिच में मदद देखकर लिया गया था। “हम थोड़ी और स्विंग की उम्मीद कर रहे थे। पिच में कुछ था, इसलिए गेंदबाज़ी करना सही लगा। शैफाली और स्मृति ने बहुत तेज़ शुरुआत दी, उस समय भारत 350 की ओर ट्रैक कर रहा था। हमारे डेथ ओवर्स शानदार रहे और 300 से नीचे रोकना बड़ा पॉज़िटिव था। रनचेज़ में हम लंबे समय तक मुकाबले में थे, पर विकेट नियमित गिरते रहे,” उन्होंने कहा। शैफाली की बल्लेबाज़ी पर कप्तान ने जोड़ा, “वह उसी अंदाज़ में खेलती हैं—जब चलती हैं, तो किसी भी टीम को भारी पड़ती हैं।”

अंत में, यह फाइनल दक्षिण अफ्रीका के लिए निराशा जरूर लाया, मगर उनकी लड़ाई, वापसी की ताकत और वोल्वार्ड्ट का रिकॉर्डतोड़ अभियान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कप्तान का संदेश साफ़ था—यह हार अंत नहीं, अगले कदम की तैयारी है।

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लेखक

  • नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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