Agriculture Tips: उत्तर भारत समेत पूरे देश में कड़ाके की ठंड और कोहरे का सितम शुरू हो गया है। जहां एक ओर आम जनजीवन इससे प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर इसका सीधा असर खेतों में लहलहाती रबी की फसलों पर भी पड़ रहा है। अगर आप भी किसान हैं और चाहते हैं कि इस बार आपकी गेहूं, जौ और सरसों की पैदावार रिकॉर्ड तोड़ हो, तो यह खबर आपके लिए ही है।
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने चेतावनी दी है कि सर्दी के इस मौसम में किसानों को अपनी फसलों के प्रति बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। तापमान में गिरावट और शीतलहर पौधों की जड़ों को कमजोर कर सकती है। एक्सपर्ट के अनुसार, सही समय पर सिंचाई और कीट नियंत्रण ही आपकी फसल को ‘बर्बाद’ होने से बचा सकता है।
1. गेहूं-जौ में दूसरी सिंचाई का है ये ‘गोल्डन टाइम’
दिनेश जाखड़ बताते हैं कि गेहूं और जौ की फसल में दूसरी सिंचाई का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसे अक्सर किसान नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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कब करें सिंचाई: बुवाई के लगभग 45 से 50 दिन बाद दूसरी सिंचाई अवश्य कर लेनी चाहिए।
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क्यों है जरूरी: यह वह समय होता है जब पौधों में ‘फुटान’ (टिलरिंग) शुरू होती है। अगर इस वक्त मिट्टी में नमी कम रही, तो पौधों की ग्रोथ रुक जाएगी और आगे चलकर बालियों की संख्या कम हो जाएगी।
2. कोहरा बनेगा वरदान या अभिशाप?
विशेषज्ञों का कहना है कि हल्का कोहरा गेहूं के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अगर पाला अधिक गिर रहा है, तो हल्की सिंचाई करना बहुत जरूरी है। इससे मिट्टी का तापमान बना रहता है और फसल ठंड की मार झेल पाती है।
3. कीटों का हमला: सरसों की फसल को ऐसे बचाएं
इस मौसम में सरसों, गेहूं और जौ पर कीटों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर ‘चेपा’ (Aphids) कीट। दिनेश जाखड़ ने इसके लिए महंगे केमिकल की जगह देसी और असरदार तरीके सुझाए हैं:
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नीम का घोल: 5 किलो नीम की पत्तियां या बीज को पानी में उबालकर ठंडा करें। 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से कीट तुरंत दूर भागते हैं।
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लहसुन-मिर्च का नुस्खा: 250 ग्राम लहसुन और 100 ग्राम हरी मिर्च का पेस्ट बनाकर 10 लीटर पानी में मिलाएं। इसे रात भर रखें और अगले दिन छानकर स्प्रे करें। यह रस चूसने वाले कीटों के लिए काल है।
4. मिट्टी को दें ‘देसी खाद’ की ताकत
सर्दी में पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने के लिए जीवामृत और गोबर खाद का प्रयोग रामबाण माना जाता है। नियमित अंतराल पर जीवामृत का छिड़काव करने से मिट्टी उपजाऊ बनती है और फसल ठंड के तनाव को आसानी से सहन कर लेती है।
5. एक्सपर्ट की सलाह: निगरानी है सबसे जरूरी
दिनेश जाखड़ के मुताबिक, खेती में मुनाफा तभी बढ़ता है जब लागत कम हो। रासायनिक दवाओं के बजाय प्राकृतिक उपायों को अपनाकर किसान अपनी लागत घटा सकते हैं और स्वस्थ फसल प्राप्त कर सकते हैं। समय-समय पर खेतों की निगरानी करें ताकि कीटों या किसी बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही चल जाए।
निष्कर्ष: अगर आप एक्सपर्ट के बताए इन सुझावों पर अमल करते हैं, तो न केवल आपकी फसल सुरक्षित रहेगी, बल्कि बाजार में आपको अपनी उपज का दाम भी बेहतरीन मिलेगा।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
