शादी का दिन हर किसी के लिए खास होता है और दुनिया भर में इसे लेकर अलग-अलग तरह की रस्में निभाई जाती हैं। भारत में जहाँ जूता छुपाई या गठबंधन जैसी रस्में मशहूर हैं, वहीं पश्चिमी देशों में ‘वेडिंग गार्टर’ (Wedding Garter) की एक ऐसी परंपरा है, जिसका इतिहास जानकर आप दंग रह जाएंगे। आज के दौर में यह रस्म भले ही मौज-मस्ती का हिस्सा बन गई हो, लेकिन पुराने समय में इसके मायने बिल्कुल अलग थे।
क्या है यह गार्टर परंपरा?
सरल शब्दों में कहें तो गार्टर कपड़े की एक पट्टी या बैंड होता है, जिसे दुल्हन अपनी ड्रेस के नीचे पैर (जांघ) पर पहनती है। शादी के रिसेप्शन के दौरान दूल्हा इस गार्टर को निकालता है और फिर इसे वहां मौजूद कुंवारे पुरुषों की भीड़ की तरफ उछाल देता है। माना जाता है कि जो शख्स इसे कैच करता है, उसकी शादी अगली होने वाली होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई?
जब दुल्हन के कपड़ों के लिए मचती थी लूट
इस रस्म की जड़ें मध्यकालीन युग (Medieval Times) से जुड़ी हैं। उस दौर में लोगों का मानना था कि दुल्हन के कपड़ों का कोई भी हिस्सा या टुकड़ा पास रखना सौभाग्य यानी ‘गुड लक’ लेकर आता है। लोग इसे इतना शुभ मानते थे कि शादी खत्म होते ही मेहमानों के बीच दुल्हन की ड्रेस का कोई हिस्सा छीनने की होड़ मच जाती थी।
कभी-कभी तो स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी कि मेहमान खुद ही दुल्हन के कपड़े फाड़ने या गार्टर खींचने की कोशिश करने लगते थे। इससे बचने के लिए दुल्हनों ने खुद ही गार्टर को उतारकर भीड़ की तरफ फेंकना शुरू कर दिया, ताकि वे अपनी कीमती ड्रेस को खराब होने से बचा सकें और मेहमानों को भी उनकी ‘किस्मत का टुकड़ा’ मिल जाए।
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समय के साथ बदला रस्म का स्वरूप
जैसे-जैसे समाज आधुनिक हुआ, इस रस्म का तरीका भी बदल गया। पुराने समय में मेहमानों की जबरदस्ती से बचने के लिए शुरू हुई यह परंपरा बाद में एक मजेदार खेल बन गई। अब इसे दूल्हा और दुल्हन के बीच एक प्राइवेट और मस्ती भरे पल के रूप में देखा जाता है। आज के समय में दुल्हनें अक्सर दो गार्टर पहनती हैं—एक जिसे दूल्हा उछाल देता है और दूसरा ‘कीपसेक’ (Keep-Sake) जिसे वह अपनी शादी की याद के तौर पर सहेज कर रखती है।
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अंधविश्वास या सिर्फ मनोरंजन?
मध्यकाल में इसे पूरी तरह अंधविश्वास से जोड़कर देखा जाता था। लोग मानते थे कि दुल्हन के पास एक सकारात्मक ऊर्जा होती है और उसकी कोई भी चीज़ हासिल करना जीवन में सुख-समृद्धि लाएगा। हालाँकि, आज के डिजिटल युग में यह सिर्फ एक सोशल मीडिया ट्रेंड और फोटोग्राफी का हिस्सा बनकर रह गया है। पश्चिमी देशों की देखा-देखी अब कई अन्य संस्कृतियों में भी इसे अपनाया जा रहा है, लेकिन इसके पीछे की हिंसक शुरुआत के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
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तो अगली बार जब आप किसी विदेशी शादी की वीडियो में गार्टर उछालते हुए देखें, तो याद रखिएगा कि यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी उस रस्म की याद है जहाँ कभी ‘गुड लक’ के चक्कर में दुल्हन की ड्रेस पर ही हमला बोल दिया जाता था।
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