कानपुर: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के साथ अब ‘कोहरे का सितम’ शुरू हो गया है। इसका सबसे बुरा असर भारतीय रेलवे के पहियों पर पड़ा है। आलम यह है कि जो ट्रेनें अपनी रफ्तार के लिए जानी जाती हैं, वे भी अब कछुए की चाल चलने को मजबूर हैं। कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर गुरुवार को नजारा कुछ ऐसा था कि यात्री ठंड में ठिठुरते रहे, लेकिन उनकी ट्रेनों का कहीं पता नहीं था।
प्रीमियम ट्रेनों की भी थमी रफ्तार
हैरानी की बात तो यह है कि रेलवे की सबसे हाई-प्रोफाइल ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे रात में पहुंचना था, वह अगले दिन सुबह कानपुर पहुंची। वहीं, लग्जरी सुविधाओं वाली तेजस एक्सप्रेस भी कोहरे के जाल में ऐसी फंसी कि 5 घंटे की देरी से स्टेशन पहुंची। सिर्फ यही नहीं, राजधानी एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेनों का भी यही हाल रहा।
कानपुर सेंट्रल स्टेशन के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को राजधानी, तेजस और वंदे भारत समेत कुल 63 ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 1 से 10 घंटे तक की देरी से चलीं। कोहरे की घनी चादर की वजह से लोको पायलट्स को सिग्नल देखने में भारी दिक्कत हो रही है, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से ट्रेनों की स्पीड काफी कम कर दी गई है।
1500 से ज्यादा यात्रियों ने कैंसिल किया टिकट
ट्रेनों की इस लेटलतीफी ने यात्रियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। कड़ाके की ठंड और घंटों के इंतजार से परेशान होकर भारी संख्या में लोगों ने अपनी यात्रा रद्द करने का फैसला लिया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गुरुवार को लगभग 1536 यात्रियों ने अपना टिकट कैंसिल करा दिया।
स्टेशन पर मौजूद यात्रियों का कहना है कि न तो पूछताछ काउंटर पर सही जानकारी मिल रही है और न ही वेटिंग रूम में इतनी भीड़ के लिए पर्याप्त जगह है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ सफर कर रहे लोगों के लिए यह स्थिति किसी दुस्वप्न से कम नहीं है।
स्टेशन पर बदहाली का आलम
कानपुर सेंट्रल के प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा है। जैसे-जैसे ट्रेनें लेट हो रही हैं, यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि कोहरे के कारण ‘फॉग डिवाइस’ का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन विजिबिलिटी (दृश्यता) बहुत कम होने की वजह से ट्रेनों को तेज चलाना जोखिम भरा है।
अगर आप भी अगले एक-दो दिनों में रेल यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का लाइव स्टेटस (Live Train Status) जरूर चेक कर लें।
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