नई दिल्ली: अगर आप भी विदेश यात्रा या अमेरिका जाकर बसने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सुपरपावर अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। जो बाइडेन प्रशासन (या वर्तमान अमेरिकी प्रशासन) के कड़े रुख के बीच, अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने रूस, ईरान और अफगानिस्तान समेत दुनिया के 75 देशों के लिए सभी प्रकार की वीजा प्रोसेसिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फैसला किया है।
आखिर अमेरिका ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया और इस फैसले के पीछे की असली वजह क्या है? आइए विस्तार से समझते हैं।
क्यों लगी वीजा पर पाबंदी? जानिए ‘पब्लिक चार्ज’ का पूरा मामला
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के इस कड़े फैसले का सबसे बड़ा कारण ‘पब्लिक चार्ज’ (Public Charge) नियम है। दरअसल, अमेरिका नहीं चाहता कि ऐसे लोग उनके देश में आएं जो वहां जाकर वहां की सरकार या सरकारी खजाने पर बोझ बनें। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी काउंसलर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन आवेदकों को वीजा देने से साफ मना कर दें, जिनके भविष्य में अमेरिकी सरकार के ‘पब्लिक बेनिफिट्स’ यानी सरकारी सुविधाओं और आर्थिक मदद पर निर्भर रहने की संभावना है।
फिलहाल, स्टेट डिपार्टमेंट अपनी स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रियाओं का फिर से मूल्यांकन (Re-assessment) कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोग ही अमेरिका में प्रवेश पाएं।
इन 75 देशों पर गिरी गाज
जिन देशों की वीजा प्रोसेसिंग रोकी गई है, उनमें दुनिया के कई प्रमुख नाम शामिल हैं। इस लिस्ट में रूस, ईरान, इराक, अफगानिस्तान, सोमालिया, ब्राजील, मिस्र, नाइजीरिया, थाईलैंड और यमन जैसे देश शामिल हैं। इन देशों के नागरिकों के लिए अब अमेरिकी वीजा पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रोक 21 जनवरी से प्रभावी होगी। प्रशासन का कहना है कि जब तक असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन देशों के आवेदनों पर आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अब उम्र और वजन के आधार पर भी रिजेक्ट होगा वीजा?
नए दिशा-निर्देशों में स्क्रीनिंग के नियमों को इतना सख्त कर दिया गया है कि अब आवेदक की छोटी-छोटी बातों पर भी गौर किया जाएगा। कॉन्सुलर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वीजा देते समय निम्नलिखित बातों का खास ध्यान रखें:
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स्वास्थ्य और उम्र: अगर किसी आवेदक की उम्र बहुत ज्यादा है या वह गंभीर रूप से बीमार है, तो उसे वीजा देने से मना किया जा सकता है।
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अंग्रेजी का ज्ञान: आवेदक को अंग्रेजी भाषा की कितनी समझ है, इसे भी आधार बनाया जाएगा।
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आर्थिक स्थिति: आवेदक के बैंक बैलेंस और फाइनेंस की गहराई से जांच होगी।
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मेडिकल हिस्ट्री: क्या आवेदक को भविष्य में लंबे समय तक मेडिकल केयर की जरूरत पड़ सकती है? अगर हां, तो आवेदन खारिज हो सकता है।
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पिछला रिकॉर्ड: अगर किसी ने पहले कभी अमेरिकी सरकारी कैश सहायता ली है या किसी संस्था में रहा है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ज्यादा वजन वाले (Obese) आवेदकों की भी सख्ती से जांच हो सकती है, क्योंकि उन्हें भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ माना जा सकता है।
“अमेरिकी लोगों की दरियादिली का गलत फायदा नहीं उठाने देंगे”
स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इस फैसले पर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “स्टेट डिपार्टमेंट अपनी पुरानी अथॉरिटी का इस्तेमाल उन संभावित प्रवासियों को रोकने के लिए करेगा जो अमेरिका पर बोझ (Public Charge) बन सकते हैं। हम नहीं चाहते कि कोई भी हमारी व्यवस्था और अमेरिकी जनता की दरियादिली का नाजायज फायदा उठाए।”
कुल मिलाकर, अमेरिका अब अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की राह पर है। वह केवल उन्हीं लोगों को अपने देश में जगह देना चाहता है जो वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें, न कि वहां की कल्याणकारी योजनाओं पर आश्रित रहें।
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