रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी आबू धाबी से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरी दुनिया के राजनयिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। खबर है कि दो कट्टर दुश्मन देश—अमेरिका और रूस—एक मेज पर साथ आए हैं। दावा किया जा रहा है कि आबू धाबी में एक ‘सीक्रेट मीटिंग’ हुई है, जिसका मुख्य एजेंडा रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर यानी युद्धविराम कराना है।
यूक्रेन गायब, फिर भी शांति की बात?
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सीक्रेट वार्ता मंगलवार तक जारी रहने की संभावना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बैठक में अमेरिका और रूस के प्रतिनिधि तो मौजूद थे, लेकिन जिस देश (यूक्रेन) की किस्मत का फैसला होना है, उसका कोई भी प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। इसी बीच यूक्रेन ने सीमा पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह शांति प्रयास वाकई सफल होगा?
अमेरिका की ‘असाधारण कूटनीतिक चाल’
एबीसी न्यूज (ABC News) ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि यह मुलाकात पहले मंगलवार को होनी थी, लेकिन इसे सोमवार को ही गुपचुप तरीके से निपटा लिया गया। अमेरिका के आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल ने आबू धाबी में रूसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
जानकारों का कहना है कि यह अमेरिका की एक ‘असाधारण कूटनीतिक चाल’ है। आमतौर पर ऐसी संवेदनशील बातचीत विदेश विभाग या उच्च स्तर के राजनयिकों के जरिए होती है, लेकिन आर्मी सेक्रेटरी को भेजना इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन अब इस संघर्ष को सैन्य-रणनीतिक (Military-Strategic) नजरिए से खत्म करना चाहता है।
घंटों चली बातचीत: क्या है 19 बिंदुओं का फॉर्मूला?
सीबीएस न्यूज के अनुसार, सोमवार रात यह बैठक घंटों चली। इसमें शांति प्रस्ताव की रफ्तार तेज करने पर चर्चा हुई। इससे पहले जिनेवा में भी अमेरिका और यूक्रेन के बीच बातचीत हुई थी, जहां अमेरिका ने रूस के साथ समझौते के लिए एक 28-बिंदु वाला प्रस्ताव रखा था। बाद में इसे संशोधित कर 19 बिंदुओं तक सीमित कर दिया गया है।
नाटो की सदस्यता पर फंसा पेंच
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव में कुछ ऐसी शर्तें शामिल हैं जिन पर यूक्रेन और यूरोपीय देश आगबबूला हो सकते हैं।
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नाटो पर बैन: प्रस्ताव में यूक्रेन की भविष्य में नाटो (NATO) सदस्यता पर रोक लगाने की बात कही गई है।
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सैन्य प्रतिबंध: यूक्रेन पर कुछ खास तरह के सैन्य प्रतिबंध लगाने की भी चर्चा है। यही वजह है कि यूरोपीय देशों में इस मीटिंग को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका चाहता है कि आबू धाबी जैसे ‘न्यूट्रल वेन्यू’ पर इस बातचीत को शांत तरीके से आगे बढ़ाया जाए ताकि रूस को युद्ध खत्म करने के लिए राजी किया जा सके।
हालांकि, इस गुप्त बैठक का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन अमेरिका और रूस का इस तरह करीब आना यूक्रेन के लिए खतरे की घंटी भी हो सकता है, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि युद्ध खत्म करने की शर्तों में यूक्रेन पर दबाव बनाया जा सकता है।
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