सावधान! भारत-अमेरिका की दोस्ती में ‘विलेन’ बन रहा है चीन? अमेरिकी रिपोर्ट के खुलासे ने मचाई खलबली

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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा पर भले ही तनाव कम होने की खबरें आ रही हों, लेकिन इसके पीछे बीजिंग की एक गहरी चाल हो सकती है। अमेरिका की एक ताजा सरकारी रिपोर्ट ने दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन, भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने का नाटक सिर्फ इसलिए कर रहा है ताकि वह भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों में दरार डाल सके।

क्या है अमेरिकी रिपोर्ट का बड़ा दावा?

अमेरिकी युद्ध विभाग (Pentagon) द्वारा कांग्रेस में पेश की गई वार्षिक रिपोर्ट ‘Military and Security Developments Involving the People’s Republic of China 2025’ के मुताबिक, चीन संभवतः एलएसी पर शांति का फायदा उठाकर द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर दिखाना चाहता है। रिपोर्ट कहती है कि चीन का असली मकसद भारत को अमेरिका के पाले में पूरी तरह जाने से रोकना है।

अक्टूबर 2024 में भारत और चीन के बीच एलएसी से सेनाएं पीछे हटाने का समझौता हुआ था। यह समझौता रूस के कज़ान में हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। अमेरिका का मानना है कि चीन इस ‘शांति’ का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर कर रहा है।

शक के घेरे में चीन की मंशा

भले ही पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें, वीजा सुविधा और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली जैसे मुद्दों पर सहमति बनी हो, लेकिन रिपोर्ट आगाह करती है कि भारत अभी भी चीन की नीयत पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहा है। रिपोर्ट में साफ लिखा है, “आपसी अविश्वास और पुराने मतभेद निश्चित रूप से दोनों देशों के रिश्तों को एक सीमा से आगे नहीं बढ़ने देंगे।”

2049 तक चीन का ‘सुपरपावर’ प्लान

इस रिपोर्ट ने चीन के उस खतरनाक विजन का भी जिक्र किया है, जिसे वह साल 2049 तक हासिल करना चाहता है। चीन का लक्ष्य ‘चीनी राष्ट्र का महान पुनरुत्थान’ करना है। इसका सीधा मतलब है कि वह दुनिया में अपनी ताकत को उस स्तर पर ले जाना चाहता है जहां उसकी सेना किसी भी युद्ध को जीतने में सक्षम हो।

चीन ने अपने ‘मुख्य हितों’ (Core Interests) की लिस्ट में ताइवान और दक्षिण चीन सागर के साथ-साथ भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश को भी शामिल कर रखा है। चीन इन क्षेत्रों पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है और रिपोर्ट के अनुसार, वह इन पर कोई समझौता नहीं करने वाला है।

ट्रंप सरकार और इंडो-पैसिफिक की रणनीति

रिपोर्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की गई है। अमेरिका का कहना है कि उसका लक्ष्य चीन को दबाना या अपमानित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कोई भी देश (विशेषकर चीन) अमेरिका या उसके सहयोगियों पर हावी न हो सके।

अमेरिका इस क्षेत्र में सैन्य मजबूती के जरिए शांति बनाए रखना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चीन के साथ निष्पक्ष व्यापार और सम्मानजनक संबंध चाहता है, लेकिन यह सब ‘शक्ति के संतुलन’ के आधार पर ही संभव होगा।

संबंधों को सुधारने की कोशिश या दिखावा?

जुलाई में भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू किया और अक्टूबर में सीधी उड़ानों पर बात बनी। लेकिन सवाल वही है कि क्या ये सब सिर्फ ऊपर-ऊपर का सुधार है? अमेरिकी रिपोर्ट की मानें तो चीन की ‘गुडविल’ के पीछे अमेरिका-भारत की रक्षा साझेदारी को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति छिपी हो सकती है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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