उत्तर प्रदेश: राज्य की योगी सरकार महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में ‘उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’ (UPSRLM) के तहत एक ऐसी सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बांदा जिले में महिलाएं अब सिर्फ घर के चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मछली पालन (Fish Farming) के व्यवसाय में उतरकर अपनी किस्मत खुद लिख रही हैं।
350 महिलाओं ने संभाली कमान
बांदा जिले में महिलाओं के सशक्तिकरण का यह नया अध्याय 19 महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा शुरू किया गया है। करीब 350 महिलाओं ने मिलकर मछली पालन को एक पेशेवर व्यवसाय के रूप में अपनाया है। ये महिलाएं पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे कम मेहनत और कम समय में अधिक मुनाफा कमाया जा सके।
बायो-फ्लॉक तकनीक: छोटी जगह, बड़ा मुनाफा
इन महिलाओं की सफलता का सबसे बड़ा राज है बायो-फ्लॉक (Bio-floc) तकनीक। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 82 बायो-फ्लॉक टैंक स्थापित किए गए हैं।
क्या है बायो-फ्लॉक? यह मछली पालन की एक आधुनिक तकनीक है जिसमें बड़े तालाब की जरूरत नहीं होती। एक छोटे टैंक में मछलियों के अपशिष्ट (Waste) को ही उनके भोजन में बदल दिया जाता है।
फायदा: इससे पानी की बचत होती है और मछलियों की पैदावार भी तेजी से होती है। बांदा की महिलाएं इस तकनीक का इस्तेमाल कर बेहद कम लागत में बेहतरीन मछलियां पाल रही हैं।
बिक्री की चिंता खत्म, सरकार ने किया खास इंतजाम
अक्सर किसानों और समूहों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे अपना माल बेचें कहां? लेकिन योगी सरकार ने इसका समाधान पहले ही निकाल लिया है।
इन महिलाओं द्वारा उत्पादित मछलियों की मार्केटिंग और बिक्री की पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार द्वारा नामित एक प्राइवेट कंपनी को सौंपी गई है। यानी महिलाओं को सिर्फ मछलियों की देखभाल और उत्पादन पर ध्यान देना है, उन्हें बेचने के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं है।
आजीविका मिशन से बदली जिंदगी
बांदा की इन महिलाओं का कहना है कि पहले वे सिर्फ मजदूरी या घर के कामों तक सीमित थीं, लेकिन ‘आजीविका मिशन’ ने उन्हें पहचान दी है। अब वे न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं, बल्कि अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए पैसे भी बचा पा रही हैं। मछली पालन से होने वाली कमाई सीधे उनके बैंक खातों में जा रही है, जिससे उनके आत्मविश्वास में भारी बढ़ोतरी हुई है।
यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को इस तरह के तकनीकी व्यवसायों से जोड़कर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाया जाए।
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