यूपी के किसानों की बल्ले-बल्ले! अब यूरिया के साथ जबरन नहीं खरीदनी होगी फालतू खाद, सरकार ने कड़ा फैसला लेकर कंपनियों की कलाई पकड़ी

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि जब किसान खाद की दुकानों पर यूरिया लेने जाते हैं, तो कंपनियां या दुकानदार उन्हें जबरन कुछ ऐसे उत्पाद (जैसे जिंक, सल्फर या अन्य महंगे टॉनिक) थमा देते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। योगी सरकार ने किसानों को इस ‘जबरन खरीदारी’ से मुक्ति दिलाने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है।

1 जनवरी से बदल गया नियम: अब मनमर्जी नहीं चलेगी

उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद आपूर्ति करने वाली संस्थाओं पर नकेल कसते हुए अनुदानित (Subsidized) उर्वरकों के साथ बिना सब्सिडी वाले उत्पादों की ‘टैगिंग’ या जबरन बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। शासन ने साफ कर दिया है कि उर्वरक बिक्री के प्राधिकार पत्र में दर्ज जो भी गैर-अनुदानित उत्पाद हैं, उनकी बिक्री और आपूर्ति 1 जनवरी 2026 से यूपी में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

इसका मतलब सीधा है—अब उर्वरक कंपनियां केवल वही खाद बेच पाएंगी जिस पर सरकार सब्सिडी देती है। किसानों को अब अपनी जेब से उन फालतू उत्पादों के लिए पैसे खर्च नहीं करने होंगे, जिनकी उन्हें असल में आवश्यकता नहीं है। इस फैसले से किसानों की खेती की लागत में कमी आएगी और उन्हें आर्थिक शोषण से राहत मिलेगी।

खेती को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों का बजट मंजूर

सिर्फ खाद ही नहीं, प्रदेश के कृषि क्षेत्र को और भी मजबूत बनाने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कृषि क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने, किसानों के कौशल विकास और पैदावार में बढ़ोतरी के लिए कुल 3.83 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई है।

इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से दो कामों के लिए होगा:

  1. कृषि परियोजनाओं का रखरखाव: पुरानी और चल रही योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करना।

  2. हाई-टेक खेती: विभाग के लिए कंप्यूटर और आधुनिक हार्डवेयर की खरीद की जाएगी ताकि किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ डिजिटल माध्यम से तेजी से पहुंचे।

ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर जोर: 10 करोड़ से ज्यादा की नई सौगात

गांवों में खेती से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भी बड़ा ऐलान हुआ है। सरकार ने कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में नई परिसंपत्तियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 10 करोड़ 98 लाख दो हजार रुपये की राशि स्वीकृत की है।

इस बजट से गांवों में कोल्ड स्टोरेज, गोदाम और अन्य जरूरी सुविधाओं का विस्तार होगा। सरकार का मानना है कि जब ग्रामीण स्तर पर आधारभूत ढांचा मजबूत होगा, तभी किसानों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी होगी। आधुनिक संसाधनों तक आसान पहुंच सुनिश्चित होने से यूपी का किसान अब और भी समृद्ध बनेगा।


 सरकार के इन फैसलों से साफ है कि 2026 किसानों के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। जहां एक तरफ यूरिया की कालाबाजारी और जबरन बिक्री पर रोक लगी है, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों के बजट से खेती को स्मार्ट बनाने की तैयारी है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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