मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में वह ऐतिहासिक मंजर आज आखिरकार दिख ही गया, जिसकी चर्चा पिछले दो दशकों से हो रही थी। बरसों की कड़वाहट और सियासी दुश्मनी को किनारे रखकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर आए। मुंबई में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों भाइयों ने शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया।
यह गठबंधन सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि 2026 के BMC चुनाव समेत राज्य के कुल 29 नगर निगम चुनावों के लिए हुआ है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति का ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है।
‘मुंबई को टूटने नहीं देंगे’: उद्धव ठाकरे
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे काफी भावुक नजर आए। उन्होंने साफ किया कि यह गठबंधन सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मुंबई की रक्षा के लिए है। उद्धव ने कहा, “ठाकरे परिवार ने हमेशा मुंबई के हक के लिए संघर्ष किया है। आज मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिशें हो रही हैं, जिसे हम सफल नहीं होने देंगे। दिल्ली में बैठे लोग हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब हमें टूटना नहीं है।”
बीजेपी के चर्चित नारे ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ पर तीखा पलटवार करते हुए उद्धव ने नया नारा दिया— ‘लड़ेंगे तो टूटेंगे’। उन्होंने कहा कि अगर मराठी मानूस आपस में ही लड़ता रहा, तो नुकसान मुंबई का होगा।
‘अगला मेयर हमारा और मराठी होगा’: राज ठाकरे
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि महाराष्ट्र का हित किसी भी व्यक्तिगत झगड़े से बड़ा है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ घोषणा की, “सीटों का आंकड़ा हमारे लिए गौण है। मुख्य लक्ष्य मुंबई की अस्मिता को बचाना है। मैं आज दावे के साथ कहता हूं कि मुंबई का अगला मेयर मराठी होगा और वह हमारे गठबंधन का ही होगा।”
क्या है सीटों का ‘सीक्रेट’ फॉर्मूला?
सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक सीटों के बंटवारे पर अंतिम मुहर लग चुकी है। मुंबई की 227 सीटों के लिए जो गणित बैठाया गया है, वह कुछ इस प्रकार है:
| पार्टी | संभावित सीटें |
| शिवसेना (UBT) | 145 से 150 |
| MNS (मनसे) | 65 से 70 |
| NCP (शरद पवार गुट) | 10 से 12 |
ठाकरे भाइयों ने बताया कि नाशिक नगर निगम के लिए भी गठबंधन फाइनल हो चुका है। हालांकि, राज ठाकरे ने यह भी जोड़ा कि उम्मीदवारों के नाम सीधे नामांकन के समय ही पता चलेंगे।
कांग्रेस और बीजेपी को दिया कड़ा संदेश
जब उद्धव ठाकरे से पूछा गया कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही है, तो उन्होंने बेबाकी से कहा, “कांग्रेस का फैसला उनका निजी निर्णय है। हमें बीजेपी की चिंता नहीं है। हम सिर्फ यह देख रहे हैं कि मराठी जनता क्या चाहती है। कोई भी मराठी प्रेमी जो हमारे विचारों से सहमत है, वह हमारे साथ आ सकता है।”
इस गठबंधन ने महायुति (BJP-शिंदे-अजित पवार) के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि ‘Brand Thackeray’ का यह जादू वोटर्स पर कितना चलता है।
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