नई दिल्ली/फ्लोरिडा: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले करीब चार साल से चल रही खूनी जंग क्या अब खत्म होने वाली है? इस सवाल का जवाब पूरी दुनिया ढूंढ रही है, लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी है। अपनी बेबाक शैली के लिए मशहूर ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को आइना दिखाते हुए साफ कह दिया है कि इस पूरे खेल के ‘असली बॉस’ वही हैं।
“जेलेंस्की का प्लान जीरो, जब तक मैं न कहूं हां”
फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में होने वाली हाई-प्रोफाइल मुलाकात से ठीक दो दिन पहले ट्रंप ने एक इंटरव्यू में जेलेंस्की पर कड़ा दबाव बनाया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जेलेंस्की की किसी भी योजना या मांग की कीमत तब तक ‘शून्य’ है, जब तक उसे व्हाइट हाउस से हरी झंडी नहीं मिल जाती। ट्रंप का यह बयान तब आया है जब जेलेंस्की सुरक्षा की बड़ी उम्मीदें लेकर अमेरिका पहुंचने वाले हैं।
क्या है 20-सूत्रीय शांति योजना? (20-Point Peace Plan)
28 दिसंबर को मार-ए-लागो में होने वाली इस ऐतिहासिक बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा ’20-सूत्रीय शांति योजना’ है। यूक्रेन चाहता है कि उसे भविष्य में रूस के हमले से बचने के लिए नाटो के ‘आर्टिकल 5’ जैसी मजबूत अमेरिकी सुरक्षा गारंटी मिले।
इस शांति योजना के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:
डिमिलिट्राइज्ड जोन: युद्ध विराम के लिए सीमाओं पर एक ऐसा क्षेत्र बनाना जहां सेना न हो।
परमाणु संयंत्र पर नियंत्रण: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जपोरिजिया परमाणु संयंत्र का प्रबंधन वापस लेना।
क्षेत्रीय रियायतें: डोनबास जैसे विवादित इलाकों पर क्षेत्रीय नियंत्रण और संभावित समझौतों पर निर्णायक बातचीत।
‘सहयोगी’ नहीं, ‘निर्णायक’ की भूमिका में ट्रंप
जेलेंस्की ने हाल ही में दावा किया था कि उनकी शांति योजना 90% तैयार है। उन्हें बस अमेरिका की अंतिम मुहर का इंतजार है। लेकिन ट्रंप के ताजा रुख ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल एक मददगार के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘सुप्रीम जज’ के तौर पर काम करेंगे। ट्रंप ने दो टूक कहा, “जेलेंस्की के पास तब तक कुछ भी नहीं है, जब तक मैं उसे मंजूर नहीं करता। हम देखेंगे कि उनके पास मेज पर रखने के लिए क्या प्रस्ताव है।”
नए साल से पहले क्या खत्म होगा युद्ध?
जेलेंस्की भी जानते हैं कि ट्रंप के बिना यह राह आसान नहीं है। उन्होंने टेलीग्राम पर स्वीकार किया कि इस शांति समझौते के चार मजबूत स्तंभ हैं—यूक्रेन, अमेरिका, रूस और यूरोप। उनके मुताबिक, रूस और यूरोप की सहमति के बिना कोई भी कागज सिर्फ एक टुकड़ा है।
पिछले हफ्ते मियामी में हुई तीन दिनों की लंबी बातचीत ने इस बैठक की जमीन तैयार की है। अब पूरी दुनिया की नजरें 28 दिसंबर पर टिकी हैं। क्या 2026 की शुरुआत शांति के संदेश के साथ होगी या ट्रंप का सख्त रवैया जेलेंस्की की उम्मीदों पर पानी फेर देगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
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