नई दिल्ली/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट (Middle East) में बारूद की गंध तेज हो गई है और ऐसा लग रहा है कि दुनिया एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। ईरान की ओर से मिली सीधी और ‘खतरनाक’ धमकी के बाद हड़कंप मच गया है। ताजा खबरों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने मिडिल ईस्ट में अपने सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य ठिकानों से सैनिकों और कर्मचारियों को अचानक वापस बुलाना शुरू कर दिया है।
क्या यह अमेरिका का डर है या किसी बड़े हमले की रणनीति? रॉयटर्स की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है।
ईरान की खुली चेतावनी: ‘हमला हुआ तो खाक हो जाएंगे अमेरिकी ठिकाने’
दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि अगर वॉशिंगटन ने ईरान पर कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। तेहरान ने सऊदी अरब, यूएई (UAE), तुर्की और कतर जैसे पड़ोसी देशों को दो-टूक कह दिया है कि अगर उनकी जमीन से अमेरिका ने उड़ान भरी, तो उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान मलबे में तब्दील कर देगा।
ईरान की इस धमकी को अमेरिका हल्के में नहीं ले रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कतर में स्थित अल उदेद एयर बेस (Al Udeid Air Base), जो मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, वहां से अमेरिकी कर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। कतर सरकार ने भी माना है कि “क्षेत्रीय तनाव” को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
दोहरे संकट में घिरा ईरान: घर में विद्रोह, बाहर युद्ध का डर
ईरान इस समय भीषण संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले दो हफ्तों से पूरे देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। आर्थिक बदहाली और पाबंदियों से गुस्साए लोग सड़कों पर हैं। एक तरफ ट्रंप प्रशासन इन प्रदर्शनों के दमन पर ईरान को ‘कड़ी कार्रवाई’ की धमकी दे रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने सरकारी टेलीविजन पर एक वीडियो जारी कर आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को जल्द से जल्द ‘फांसी’ की सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर हमें कुछ करना है, तो तुरंत करना होगा। दो-तीन महीने की देरी से इसका असर खत्म हो जाएगा।”
ट्रंप की ललकार: “हम चुप नहीं बैठेंगे”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस अड़ियल रवैये पर सख्त रुख अपनाया है। एक हालिया इंटरव्यू में ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी या हिंसा नहीं रोकी, तो अमेरिका चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, “हम बेहद कड़ी कार्रवाई करेंगे। अगर वे ऐसा कुछ करते हैं, तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।”
ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए सोशल मीडिया पर यहां तक लिख दिया कि “मदद आ रही है” (Help is on the way)। अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप वाकई युद्ध की तैयारी कर रहे हैं या फिर ईरान की जवाबी कार्रवाई के डर से पीछे हट रहे हैं?
फिलहाल, कतर के अल उदेद बेस से अमेरिकी सैनिकों की वापसी को एक ‘एहतियाती कदम’ बताया जा रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी बड़े तूफान से पहले की शांति भी हो सकती है।
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