कंगाल पाकिस्तान को लॉलीपॉप दिखाकर ट्रंप सीधे करेंगे 3 उल्लू, नया ऑफर सुन उड़े शहबाज-मुनीर के होश!

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जिन्ना का देश पाकिस्तान आज उस मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे चलाने के लिए शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर को दुनिया के सामने कटोरा लेकर घूमना पड़ रहा है। देश की हालत ऐसी है कि सरकारी संपत्तियां कौड़ियों के दाम बिक रही हैं। ऐसे में अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को एक ऐसा ‘लॉलीपॉप’ दिखाया है, जिसे निगलना पाकिस्तान के लिए मजबूरी भी है और गले की फांस भी।

शहबाज-मुनीर की जोड़ी देश चलाने के लिए ट्रंप के लगभग पैर पकड़ चुकी है। ट्रंप ने बार-बार पाकिस्तान को IMF से लोन तो दिलवाया, लेकिन उसकी कीमत पाकिस्तान को अपनी सरकारी संपत्तियां बेचकर चुकानी पड़ रही है। सरकारी एयरलाइन PIA पहले ही नीलाम हो चुकी है, और अब नजरें पाकिस्तान के रेलवे और खनिज भंडार पर हैं।

ट्रंप ने कौन सी ‘लॉलीपॉप’ दिखाई?

अमेरिका ने पाकिस्तान के चरमराते रेलवे नेटवर्क को फिर से खड़ा करने के लिए एक ‘संजीवनी ऑफर’ भेजा है। अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को अत्याधुनिक अमेरिकी लोकोमोटिव (रेल इंजन) खरीदने का प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए टेंडर भी जारी हो चुका है। पाकिस्तान रेलवे इस समय आर्थिक तंगी और पुराने इंजनों की वजह से बर्बादी की कगार पर है। ट्रंप जानते हैं कि पाकिस्तान को इस समय इंजनों की सख्त जरूरत है, और इसी जरूरत का फायदा उठाकर उन्होंने 3 भारी-भरकम शर्तें रख दी हैं।

पहली शर्त: एलन मस्क के लिए बिछेगा रेड कारपेट

ट्रंप की पहली और सबसे बड़ी शर्त यह है कि एलन मस्क की कंपनी Starlink को पाकिस्तान में सैटेलाइट इंटरनेट का लाइसेंस तुरंत दिया जाए। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि इससे पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा, लेकिन असल में यह मस्क और ट्रंप के कारोबारी हितों को साधने की एक बड़ी चाल है।

दूसरी शर्त: टेक दिग्गजों को भारी टैक्स छूट

दूसरी शर्त डिजिटल सर्विस टैक्स (DST) को लेकर थी, जिसे पाकिस्तान ने दबाव में आकर मान भी लिया है। पाकिस्तान ने विदेशी टेक कंपनियों पर लगने वाला 5% डिजिटल सर्विस टैक्स हटा दिया है। अब गूगल, नेटफ्लिक्स और अमेज़न जैसी अमेरिकी कंपनियां बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के पाकिस्तान में मोटा मुनाफा कमा सकेंगी। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी का यह सीधा असर है।

तीसरी शर्त: पाकिस्तान के खजाने की चाबी अमेरिका के पास

तीसरी और सबसे खतरनाक शर्त पाकिस्तान के खनिज भंडार (Minerals) को लेकर है। ट्रंप की नजर पाकिस्तान की मिट्टी में दबे अरबों डॉलर के खजाने पर है। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान के मिनिरल रिजर्व का आकलन अमेरिकी कंपनियां करें। इसके लिए अमेरिका ने अपने $135 बिलियन के ग्लोबल फंड का लालच दिया है। शर्त साफ है—पाकिस्तान के कीमती खनिजों को निकालने और निर्यात करने का अधिकार जल्द से जल्द अमेरिकी कंपनियों को सौंपा जाए।

क्या शहबाज-मुनीर के पास कोई और रास्ता है?

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उसके पास इन शर्तों को मानने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। पाकिस्तान रेलवे अपनी मरम्मत के लिए करोड़ों खर्च कर रहा है लेकिन इंजन फिर भी जवाब दे रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी इंजनों का ऑफर पाकिस्तान को डूबते को तिनके का सहारा जैसा लग रहा है, भले ही इसके बदले उसे अपना स्वाभिमान और संसाधन अमेरिका के पैरों में क्यों न रखने पड़ें।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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