भुवनेश्वर/कंधमाल: लाल गलियारे (Red Corridor) से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सुरक्षाबलों ने नक्सली संगठन को एक और करारा झटका देते हुए टॉप नक्सली कमांडर और केंद्रीय कमेटी के सदस्य गणेश उइके को एनकाउंटर में मार गिराया है। हिडमा के बाद गणेश उइके का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए साल की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
ओडिशा के कंधमाल जिले में हुए इस जबरदस्त एनकाउंटर में उइके के साथ तीन अन्य नक्सली भी ढेर हुए हैं। गणेश उइके कोई साधारण नक्सली नहीं था, उस पर सरकार ने 1.1 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था।
खुफिया इनपुट ने बिछाया मौत का जाल
जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को खुफिया विभाग से पुख्ता जानकारी मिली थी कि कंधमाल के घने जंगलों में कुछ बड़े नक्सली नेता किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए जुटे हैं। जैसे ही नक्सलियों की मौजूदगी का इनपुट मिला, ओडिशा पुलिस और सुरक्षाबलों की स्पेशल टीम ने बिना वक्त गंवाए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
जंगल की घेराबंदी करते हुए सुरक्षाबल जैसे ही नक्सलियों के ठिकाने के करीब पहुंचे, खुद को घिरा देख नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की। घंटों चली इस मुठभेड़ में गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा जंगल गूंज उठा।
1.1 करोड़ का इनामी था उइके
एनकाउंटर खत्म होने के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई, तो वहां चार नक्सलियों के शव बरामद हुए। पहचान करने पर पता चला कि इनमें से एक मुख्य शव नक्सली संगठन की सेंट्रल कमेटी के सदस्य गणेश उइके का है। उइके ओडिशा में नक्सली गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जाता था और लंबे समय से पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था।
राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “गणेश उइके का मारा जाना नक्सली नेटवर्क की कमर तोड़ने जैसा है। वह ओडिशा में संगठन का प्रमुख था और कई बड़े हमलों में शामिल रहा था।”
दो महिला नक्सली भी ढेर
इस मुठभेड़ में गणेश उइके के अलावा तीन और नक्सली मारे गए हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, अभी तक इन तीनों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस को शक है कि ये भी संगठन के कैडर में अहम भूमिका निभा रहे थे। मौके से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।
इलाके में हाई अलर्ट
इस बड़ी कार्रवाई के बाद आसपास के जिलों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जंगलों में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि अगर कोई और नक्सली छिपा हो तो उसे पकड़ा जा सके। सुरक्षाबलों की इस कामयाबी से नक्सली बैकफुट पर आ गए हैं। हिडमा जैसे बड़े चेहरों के बाद अब गणेश उइके का खत्म होना यह साफ करता है कि सरकार अब नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में है।
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