देवबंद: उत्तर प्रदेश के देवबंद में किसान राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह ने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं और वह किसानों का उत्थान नहीं चाहती। मंगलवार को साखन गांव में आयोजित किसान गोष्ठी में उन्होंने न केवल गन्ने के भाव पर सरकार को आईना दिखाया, बल्कि बांग्लादेश के ताजा हालात पर भी केंद्र सरकार से बड़े एक्शन की मांग कर डाली।
गन्ना मूल्य: ऊंट के मुंह में जीरा!
ठाकुर पूरण सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में घोषित किए गए गन्ना मूल्य को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस मूल्य को ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बताते हुए कहा कि जिस रफ्तार से खेती की लागत बढ़ी है, उस हिसाब से यह वृद्धि कुछ भी नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
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किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य तो छोड़िए, लागत मूल्य भी नसीब नहीं हो रहा है।
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सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण आज का युवा खेती से पीछा छुड़ा रहा है और शहरों की ओर पलायन को मजबूर है।
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किसान आज बर्बादी की कगार पर खड़ा है और उसकी सुनने वाला कोई नहीं है।
‘बांग्लादेश में हिंदुओं पर जुल्म बर्दाश्त नहीं’
अपनी इस गोष्ठी में ठाकुर पूरण सिंह ने सिर्फ किसानों की ही बात नहीं की, बल्कि सीमा पार बांग्लादेश में हो रही घटनाओं पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने वहां हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को ‘मानवता को शर्मसार करने वाला’ बताया। उन्होंने केंद्र सरकार को ललकारते हुए कहा कि भारत को अब इस मुद्दे पर चुप्पी साधनी बंद करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि भारत सरकार बांग्लादेश के खिलाफ कोई ठोस और कठोर कदम उठाए ताकि वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
संगठन में बढ़ा कुनबा
साखन गांव की इस गोष्ठी में संगठन को और मजबूती मिली। इस अवसर पर क्षेत्र के चर्चित समाजसेवी कमलकांत उर्फ मोनू त्यागी ने अपने कई साथियों के साथ किसान मजदूर संगठन की सदस्यता ली। जिलाध्यक्ष अजब सिंह और महेश त्यागी ने नए सदस्यों का स्वागत किया और कहा कि हक की इस लड़ाई को अब गांव-गांव तक ले जाया जाएगा।
इस बैठक के दौरान लोकेश राणा, लाखन राणा, महेश त्यागी (जयपुर), विश्वास त्यागी, मास्टर विश्वास और बृजभूषण शर्मा समेत भारी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में ठाकुर पूरण सिंह की मांगों का समर्थन किया।
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