ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद वतन लौटे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने अपनी पहली जनसभा में कुछ ऐसा कह दिया है, जिसकी चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है। ढाका की सड़कों पर जब रहमान ने बोलना शुरू किया, तो लाखों की भीड़ उनके समर्थन में नारेबाजी करने लगी।
रहमान का यह भाषण सिर्फ एक राजनीतिक संबोधन नहीं, बल्कि अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के लिए एक सीधा और सख्त मैसेज माना जा रहा है।
“सबका है यह बांग्लादेश”
लंदन से लौटने के बाद अपने पहले ही भाषण में तारिक रहमान ने सांप्रदायिक सौहार्द पर बड़ा जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बांग्लादेश सिर्फ किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि यह मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों—सबका देश है।” रहमान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब शेख हसीना के जाने के बाद और मोहम्मद यूनुस के कार्यभार संभालने के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की खबरें सामने आई थीं। जानकारों का मानना है कि रहमान ने यह संदेश देकर न केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांत करने की कोशिश की है, बल्कि यूनुस सरकार को यह भी अहसास कराया है कि देश में सुरक्षा व्यवस्था और समावेशी राजनीति की भारी कमी है।
क्या अगले प्रधानमंत्री होंगे तारिक रहमान?
बांग्लादेश में फरवरी 2025 में आम चुनाव होने तय हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। 17 सालों तक लंदन में रहने के बावजूद उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है, जिसका सबूत ढाका में उमड़ा यह जनसैलाब है।
रहमान ने अपने भाषण में कहा कि उनके पास देश के भविष्य के लिए एक ठोस योजना (विज़न) है। उन्होंने वादा किया कि उनकी पार्टी एक ऐसा बांग्लादेश बनाएगी जहां हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे।
मोहम्मद यूनुस के लिए क्यों है यह बड़ी चुनौती?
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार इस समय कानून-व्यवस्था को लेकर काफी दबाव में है। हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा ने वैश्विक स्तर पर बांग्लादेश की छवि को नुकसान पहुँचाया है। तारिक रहमान ने अपने भाषण में ‘सबके बांग्लादेश’ की बात कहकर यूनुस प्रशासन की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। यह इस बात का संकेत है कि आने वाले चुनाव में बीएनपी ‘धर्मनिरपेक्षता और सुरक्षा’ को एक बड़ा मुद्दा बनाने वाली है।
बीएनपी के समर्थकों का मानना है कि तारिक रहमान की वापसी से पार्टी में नई जान आ गई है। अब देखना यह होगा कि फरवरी में होने वाले चुनाव में जनता तारिक रहमान के इस ‘समावेशी विज़न’ पर कितना भरोसा जताती है।
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