नई दिल्ली/वॉशिंगटन:
तकनीक की दुनिया से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने सबको हैरान कर दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक, अमेरिका की स्ट्राइकर (Stryker), एक बड़े और विनाशकारी साइबर हमले की चपेट में आ गई है। बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद कंपनी का पूरा वैश्विक नेटवर्क ठप हो गया है और हजारों कर्मचारियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन से डेटा पूरी तरह डिलीट यानी ‘वाइप’ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला बुधवार तड़के शुरू हुआ। स्ट्राइकर के कर्मचारियों ने बताया कि अचानक उनके ऑफिस के कंप्यूटरों और फोन से सारा डेटा गायब होने लगा। कई कर्मचारियों के लॉगिन पेज पर एक खास लोगो (Logo) नजर आने लगा, जिसे ‘हंडाला’ (Handala) नाम के हैकर ग्रुप से जोड़ा जा रहा है। इस हमले की वजह से कंपनी के 79 देशों में मौजूद ऑफिसों में काम पूरी तरह रुक गया है।
स्ट्राइकर, जो अस्पतालों के लिए सर्जिकल उपकरण, बेड और ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स बनाती है, ने इस घटना की पुष्टि की है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वे अपने ‘माइक्रोसॉफ्ट एनवायरनमेंट’ में एक बड़ी नेटवर्क गड़बड़ी का सामना कर रहे हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि यह रैंसमवेयर हमला है या कुछ और, लेकिन शुरुआती जांच इशारा कर रही है कि यह सिस्टम को बर्बाद करने के मकसद से किया गया ‘वाइपर’ हमला हो सकता है।
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ईरानी हैकर्स का हाथ होने का शक
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप ‘हंडाला’ का हाथ होने का दावा किया जा रहा है। हैकर्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने स्ट्राइकर के 2 लाख से ज्यादा सिस्टम, सर्वर और मोबाइल डिवाइस को पूरी तरह से खाली कर दिया है। इतना ही नहीं, हैकर्स ने करीब 50 टेराबाइट (TB) डेटा चोरी करने का भी दावा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल पैसे के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक कारणों से किया गया है। हैकर्स ने अपने संदेश में इसे ‘बदले की कार्रवाई’ बताया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और साइबर जगत इस जंग का नया मैदान बन गया है।
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कर्मचारियों को दी गई ये सलाह
हमले की गंभीरता को देखते हुए स्ट्राइकर ने अपने हजारों कर्मचारियों को तुरंत अपने डिवाइस बंद करने और कंपनी के नेटवर्क से डिस्कनेक्ट होने की सलाह दी है। कई जगहों पर कर्मचारियों को घर भेज दिया गया है क्योंकि उनके सिस्टम अब काम करने लायक नहीं बचे हैं। आईटी विशेषज्ञ अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि हैकर्स ने कंपनी के ‘एक्टिव डायरेक्टरी’ और ‘माइक्रोसॉफ्ट इनट्यून’ जैसे सिस्टम तक पहुंच कैसे बनाई, जिससे उन्हें एक साथ हजारों डिवाइस को रिमोटली फॉर्मेट करने की ताकत मिल गई।
मरीजों और अस्पतालों पर क्या होगा असर?
स्ट्राइकर के उत्पाद दुनिया भर के अस्पतालों में इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में इस हमले का असर सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। अगर कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक सिस्टम लंबे समय तक ठप रहते हैं, तो सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरणों की कमी हो सकती है। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि वे अपनी ‘बिजनेस कंटिन्यूटी’ योजनाओं पर काम कर रहे हैं ताकि ग्राहकों को कम से कम परेशानी हो।
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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला भविष्य की एक बड़ी चेतावनी है। जब दुनिया की इतनी बड़ी कंपनी के सुरक्षित नेटवर्क को इस तरह भेद दिया जाता है, तो यह बाकी सभी संस्थानों के लिए खतरे की घंटी है। फिलहाल, माइक्रोसॉफ्ट के इंजीनियर और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने में जुटी हैं।
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