तख्तापलट की कोशिश पड़ी भारी! दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को मिली उम्रकैद, सेना के दम पर कब्जाना चाहते थे संसद

यून सुक येओल को उम्रकैद: मार्शल लॉ केस में बड़ा फैसला

सियोल: दक्षिण कोरिया की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। देश की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल (Yoon Suk-yeol) को उम्रकैद यानी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला उस सनसनीखेज मामले में आया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। यून सुक येओल पर 2024 में देश में अवैध रूप से मार्शल लॉ (Martial Law) लगाने, सत्ता का दुरुपयोग करने और विद्रोह की साजिश रचने के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं।

मौत की सजा से बाल-बाल बचे पूर्व राष्ट्रपति

अदालत में सुनवाई के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण था। अभियोजकों ने यून के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति जैसे उच्च पद पर रहते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार किया है। हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें फांसी तो नहीं दी, लेकिन ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश सुना दिया। बता दें कि दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है, जिसे वहां मौत की सजा पर एक व्यावहारिक रोक माना जाता है।

उस रात क्या हुआ था? लोकतंत्र पर हमले की पूरी कहानी

यह मामला दिसंबर 2024 का है, जब 65 वर्षीय यून सुक येओल ने एक रात अचानक मार्शल लॉ की घोषणा कर दी थी। उन्होंने सेना और पुलिस को आदेश दिया कि वे संसद (National Assembly) पर नियंत्रण कर लें। उस दौरान राजधानी सियोल की सड़कों पर भारी हथियारों से लैस सैनिक और टैंक नजर आने लगे थे।

आरोप है कि यून उस समय की नेशनल असेंबली को भंग करना चाहते थे, जहाँ विपक्ष का बहुमत था। उन्होंने अपने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा था कि वह “राष्ट्र विरोधी ताकतों” को खत्म करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। लेकिन हकीकत में यह सत्ता पर एकाधिकार जमाने की एक नाकाम कोशिश थी।

6 घंटे का वो ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’

सियोल में करीब 6 घंटे तक मार्शल लॉ लागू रहा। उस रात सेना ने संसद भवन को चारों तरफ से घेर लिया था। लेकिन दक्षिण कोरिया के सांसदों ने गजब की हिम्मत दिखाई। कई सांसद दीवारें फांदकर और अवरोधों को तोड़कर संसद के भीतर दाखिल हुए। वहां उन्होंने सर्वसम्मति से मार्शल लॉ को हटाने के पक्ष में मतदान किया। कानूनन राष्ट्रपति को संसद का यह फैसला मानना पड़ा और मजबूरन उन्हें अपना आपातकालीन आदेश वापस लेना पड़ा। इस घटना ने देश को एक बड़े राजनीतिक संकट में धकेल दिया था।

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अदालत ने केवल राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि इस ‘साजिश’ में उनका साथ देने वाले करीबियों को भी कड़ी सजा सुनाई है:

दस्तावेजों में हेरफेर और गिरफ्तारी का विरोध

यून सुक येओल पर केवल मार्शल लॉ का ही केस नहीं था। उन पर पिछले महीने गिरफ्तारी का विरोध करने और मार्शल लॉ से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों में हेरफेर करने के भी आरोप लगे थे। कोर्ट ने पाया कि उन्होंने बिना किसी कैबिनेट बैठक के गुपचुप तरीके से आपातकालीन आदेश जारी किए थे, जो पूरी तरह असंवैधानिक था।

दक्षिण कोरिया के इस ऐतिहासिक फैसले ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह देश का राष्ट्रपति ही क्यों न हो। फिलहाल यून के वकीलों ने ऊपरी अदालत में अपील की बात कही है, लेकिन इस फैसले ने उनकी राजनीतिक पारी पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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