आज 14 मार्च है। गणित की दुनिया में इस तारीख का एक खास मुकाम है। दुनिया भर के वैज्ञानिक, छात्र और गणित प्रेमी आज के दिन को ‘पाई डे’ (Pi Day) के रूप में मना रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक मामूली से दिखने वाले नंबर $\pi$ (Pi) के लिए इतनी दीवानगी क्यों है? आखिर क्यों नासा (NASA) से लेकर इसरो (ISRO) तक, हर अंतरिक्ष एजेंसी इस एक नंबर के बिना अधूरी है? आइए जानते हैं इस दिलचस्प दिन के पीछे की पूरी कहानी।
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तारीख और समय का है अनोखा खेल
पाई डे मनाने के पीछे एक बहुत ही मजेदार लॉजिक है। गणित में पाई का मान लगभग 3.14 होता है। अगर आप अमेरिकी कैलेंडर के हिसाब से देखें, तो मार्च साल का तीसरा महीना है और आज तारीख है 14। यानी यह बन गया 3/14। इसी समानता की वजह से आज के दिन पाई डे मनाया जाता है।
हैरानी की बात तो यह है कि इसे मनाने का एक खास समय भी तय है। पाई की वैल्यू के अगले अंक 159 हैं, इसलिए इसे दोपहर के 1 बजकर 59 मिनट पर सेलिब्रेट किया जाता है। इस तरह 3.14159 के मेल से पाई का सटीक सम्मान किया जाता है।
क्यों खास है $\pi$ (Pi)?
पाई सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह एक ‘मैथमेटिकल कांस्टेंट’ है। यह किसी भी सर्कल यानी वृत्त की परिधि (Circumference) और उसके व्यास (Diameter) का अनुपात होता है। दिलचस्प बात यह है कि सर्कल चाहे आपकी उंगली की अंगूठी हो या ब्रह्मांड का कोई विशाल ग्रह, पाई की वैल्यू हमेशा एक समान रहती है।
पाई एक ‘इर्रेशनल नंबर’ है। इसका मतलब यह है कि दशमलव के बाद इसके अंक कभी खत्म नहीं होते और न ही कोई पैटर्न रिपीट करते हैं। अब तक कंप्यूटर की मदद से इसके ट्रिलियन अंकों का पता लगाया जा चुका है, लेकिन इसका अंत आज भी एक रहस्य बना हुआ है।
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अंतरिक्ष की खोज में पाई का रोल
अगर आज हमारे पास पाई नहीं होता, तो शायद हम चांद या मंगल पर कभी नहीं पहुँच पाते। नासा के वैज्ञानिक ग्रहों की कक्षा (Orbit) निकालने, उनकी सतह को मापने और स्पेसक्राफ्ट को सही दिशा में भेजने के लिए पाई का ही इस्तेमाल करते हैं। इसके बिना विमानों के उड़ने से लेकर जीपीएस (GPS) तकनीक तक, सब कुछ फेल हो सकता है।
आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग का कनेक्शन
पाई डे का विज्ञान की दुनिया के दो सबसे बड़े दिग्गजों के साथ भी एक गजब का इत्तेफाक है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च (1879) को हुआ था। वहीं, दुनिया के मशहूर भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का निधन 14 मार्च (2018) को हुआ था। ये इत्तेफाक आज के दिन को और भी ज्यादा यादगार बना देते हैं।
कैसे मनाया जाता है यह दिन?
भारत समेत पूरी दुनिया में पाई डे को काफी रचनात्मक तरीके से मनाया जाता है। स्कूलों और कॉलेजों में मैथ्स क्विज होते हैं। चूंकि अंग्रेजी शब्द ‘Pi’ का उच्चारण खाने वाले ‘Pie’ जैसा होता है, इसलिए कई देशों में लोग आज के दिन पाई काटकर या गोल आकार की चीजें खाकर जश्न मनाते हैं।
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तो अगली बार जब आप किसी गोल चीज़ को देखें, तो याद रखिएगा कि उसके पीछे गणित का एक गहरा राज छिपा है, जिसे हम पाई कहते हैं।
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