Current date 21/03/2026

बिजनेस की दुनिया के ‘अमर’ होने का राज! क्यों 95% फैमिली बिजनेस हो जाते हैं फेल? जानें टिके रहने के 5 मंत्र

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नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था में अगर कोई असली ‘बैकबोन’ है, तो वो हैं पारिवारिक व्यवसाय (Family Owned Businesses)। क्या आप जानते हैं कि भारत की जीडीपी (GDP) में 75% से ज्यादा का योगदान इन्हीं फैमिली बिजनेस का है? लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि जैसे-जैसे पीढ़ी बदलती है, बिजनेस का दम निकलने लगता है।

आंकड़े चौंकाने वाले हैं: लगभग सभी बिजनेस अपने शुरूआती दौर में फलते-फूलते हैं, लेकिन सिर्फ 30-33% ही दूसरी पीढ़ी तक पहुँच पाते हैं। तीसरी पीढ़ी तक पहुँचते-पूँछते यह आंकड़ा गिरकर 10-15% रह जाता है, और चौथी पीढ़ी तक तो केवल 3-5% बिजनेस ही जिंदा बचते हैं। आखिर वो क्या ‘सीक्रेट सॉस’ है जो कुछ बिजनेस को सदियों तक जिंदा रखता है? आइए जानते हैं वो 5 स्तंभ।

1. ‘मकसद’ जो कभी पुराना नहीं होता (Purpose as a Compass)

सफल बिजनेस सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि एक खास उद्देश्य के लिए चलते हैं। यह उद्देश्य संस्थापक के मूल्यों से आता है। स्वीडन की मशहूर फर्नीचर कंपनी (IKEA) इसका बड़ा उदाहरण है। 80 साल बाद भी वे अपने संस्थापक के ‘किफायती और बेहतरीन डिजाइन’ के सिद्धांत पर कायम हैं। जब बिजनेस का कोई बड़ा मकसद होता है, तो वह बाजार के उतार-चढ़ाव में भी रास्ता नहीं भटकता।

2. खुद को मालिक नहीं, ‘रखवाला’ समझें (The Power of Stewardship)

लंबे समय तक चलने वाली कंपनियां ‘मालिकाना हक’ से ऊपर उठकर ‘स्टुअर्डशिप’ यानी रखवाली की मानसिकता पर काम करती हैं। इसका मतलब है कि आप बिजनेस के मालिक नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए उसे सहेजने वाले ट्रस्टी हैं। इसमें अनुशासन, सही गवर्नेंस और उत्तराधिकार की स्पष्ट योजना शामिल है। ये कंपनियां बैलेंस शीट को मजबूत रखने और जोखिम को सोच-समझकर उठाने पर ध्यान देती हैं।

3. भविष्य के लीडर्स को तैयार करना (Nurturing Future Leadership)

नेतृत्व रातों-रात पैदा नहीं होता। सफल कंपनियां अपने उत्तराधिकारियों को बहुत पहले से तैयार करना शुरू कर देती हैं। उन्हें अलग-अलग विभागों में काम करने का मौका दिया जाता है ताकि वे जमीन से जुड़े रहें। यहाँ ‘योग्यता’ के साथ-साथ ‘संस्कारों’ (Values) पर भी जोर दिया जाता है। एक मजबूत लीडरशिप बेंच ही कंपनी को मुश्किल वक्त से बाहर निकालती है।

4. अनुशासन और लचीला शासन (Prudent and Adaptive Governance)

भारत के बड़े कॉर्पोरेट घराने (जैसे टाटा या अंबानी) अपनी सफलता का श्रेय एक स्पष्ट ‘गवर्नेंस मॉडल’ को देते हैं। इसमें परिवार के सदस्यों, बोर्ड के सदस्यों और पेशेवर मैनेजमेंट के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है। शासन ऐसा होना चाहिए जो भविष्य की चुनौतियों के लिए लचीला हो लेकिन अनुशासन में कोई कमी न आए। यह मॉडल शॉर्ट-टर्म मुनाफे के बजाय लॉन्ग-टर्म स्थिरता पर फोकस करता है।

5. अपनी ‘सुपरपावर’ को पहचानें (Sharpening Core Superpowers)

हर महान बिजनेस की अपनी एक ‘सुपरपावर’ होती है। किसी के लिए यह डिजाइन हो सकता है, किसी के लिए कारीगरी, तो किसी के लिए सप्लाई चेन। फ्रांस की मशहूर लग्जरी कंपनियां अपनी ‘शिल्प कौशल’ को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बचाकर रखती हैं। वे अपनी क्वालिटी बनाए रखने के लिए उत्पादन को सीमित रखती हैं, ताकि ब्रांड की विशिष्टता बनी रहे।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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    दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
    फिलहाल वे BigNews18.in पर हिंदी न्यूज़ लिखते हैं, जहां वे हर खबर को तेज़ी, सटीकता और संदर्भ के साथ पेश करते हैं।
    जटिल सूचनाओं को सरल, प्रभावी भाषा में बदलना उनकी खासियत है।

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Divyanshu

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