देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर बहस उस समय और गरम हो गई जब वकील प्रशांत भूषण की टिप्पणियों पर खुद CJI सूर्यकांत को हस्तक्षेप करना पड़ा। भूषण ने चुनाव आयोग (EC) के फैसले को ‘अभूतपूर्व’ और ‘निरंकुश’ बताते हुए कई गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद पीठ ने उन्हें दलीलों तक सीमित रहने की सलाह दी।
मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें कई राज्यों में चल रहे SIR की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि चुनाव आयोग ने जिन वजहों—जैसे तेज़ी से शहरीकरण और लगातार प्रवास—का हवाला दिया है, वे इतने बड़े स्तर पर पूरी मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि आयोग की ओर से बताए गए कारण न केवल कमजोर हैं, बल्कि उनका तार्किक आधार भी साफ नहीं है। सिंघवी ने कहा, “शहरीकरण कोई एक-दो साल की प्रक्रिया नहीं है। ये तो कई वर्षों से जारी है। फिर अचानक इसे SIR का आधार कैसे मान लिया गया? कोई इलाका कब ग्रामीण से शहरी घोषित होगा, ये कैसे तय होगा?” उनका कहना था कि ‘तेज़ शहरीकरण’ को इतने बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण का आधार नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि कानून में चुनाव आयोग को ‘विशेष संशोधन’ की अनुमति तो है, लेकिन यह हर निर्वाचन क्षेत्र के लिए अलग-अलग उचित कारण के साथ ही किया जा सकता है। सिंघवी ने साफ कहा, “नियमों में ‘किसी भी निर्वाचन क्षेत्र’ का मतलब यह नहीं कि देशभर के सभी क्षेत्रों को एक साथ संशोधित किया जाए। यह कानून का सीधा-सीधा उल्लंघन है।”
इस दौरान वकील प्रशांत भूषण ने SIR प्रक्रिया को लेकर और भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह फैसला “अभूतपूर्व” है क्योंकि “पहली बार पूरी मतदाता सूची को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, यह सामान्य संशोधन नहीं है।” भूषण ने यह भी आरोप लगाया कि प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है और जमीनी कर्मचारियों पर काफी दबाव डाला जा रहा है।
भूषण ने अपनी बात को मजबूती देने के लिए मीडिया रिपोर्ट्स भी सामने रखीं, जिनमें दावा किया गया है कि SIR के बावजूद “पांच लाख से ज्यादा डुप्लिकेट वोटर” अभी भी सूची में मौजूद हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि कई लोग मानते हैं कि आयोग “तानाशाह की तरह” व्यवहार कर रहा है। इसी टिप्पणी पर CJI ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए भूषण से कहा, “कृपया ऐसे व्यापक बयान न दें। खुद को दलीलों तक सीमित रखें।”
सुनवाई के दौरान वकील अश्विनी उपाध्याय ने पश्चिम बंगाल में ब्लॉक-स्तरीय अधिकारियों पर कथित हमलों का मुद्दा भी उठाया। इस पर CJI ने कहा, “अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। चिंता न करें।”
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई मंगलवार को लगातार तीसरे दिन चली। अब कोर्ट 4 दिसंबर, गुरुवार को इस मामले की सुनवाई दोबारा शुरू करेगा, जहां प्रशांत भूषण अपनी शेष दलीलें पेश करेंगे।
देशभर में SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है। यह मामला न केवल मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़ा है बल्कि चुनाव आयोग के अधिकारों की सीमा और उनके इस्तेमाल पर भी बड़े सवाल उठा रहा है। आने वाली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि क्या SIR को कानूनी तौर पर वैध माना जाएगा या फिर इसे वापस लेने की नौबत आएगी।
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