मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। यमन, जो पिछले एक दशक से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है, अब दो ‘दोस्त’ देशों—सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)—के बीच वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र बन गया है। हाल ही में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दक्षिणी यमन में UAE समर्थित अलगाववादी समूह ‘सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल’ (STC) पर भीषण हवाई हमले किए हैं।
इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है क्योंकि सऊदी और UAE लंबे समय से एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। लेकिन अब यमन के हद्रामौत गवर्नरेट में हुई इस बमबारी ने साफ कर दिया है कि गठबंधन के भीतर दरारें बहुत गहरी हो चुकी हैं।
चेतावनी के बाद बरसी मिसाइलें
बमबारी से ठीक पहले सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अलगाववादियों को सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि STC के सैनिकों के लिए “अब समय आ गया है” कि वे शांतिपूर्वक पीछे हट जाएं और समझदारी दिखाएं। इस धमकी के कुछ ही घंटों बाद बम धमाकों से यमन का दक्षिणी इलाका दहल उठा। हालांकि, सऊदी अरब ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन मौके पर मिले जले हुए सैन्य वाहन और चश्मदीदों के बयान सऊदी की ओर ही इशारा कर रहे हैं।
यमन के टुकड़े होने का डर क्यों?
यमन का संघर्ष अब केवल सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच नहीं रह गया है। यह देश अब तीन हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है:
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उत्तर यमन: यहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का मजबूत कब्जा है।
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दक्षिण यमन (अदन): यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी समर्थित सेना का प्रभाव है।
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अलगाववादी क्षेत्र: यहां STC (UAE समर्थित) अपना अलग देश बनाने की मांग कर रही है।
हाल ही में STC ने तेल से भरपूर हद्रामौत और महरा प्रांतों पर कब्जा करने की कोशिश की, जिससे सऊदी समर्थित ‘नेशनल शील्ड फोर्सेस’ को पीछे हटना पड़ा। इसी कब्जे ने सऊदी अरब के सब्र का बांध तोड़ दिया।
यमन का खूनी इतिहास: 1990 से अब तक
यमन की बर्बादी की कहानी दशकों पुरानी है। इसे नीचे दिए गए टाइमलाइन से समझा जा सकता है:
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1990: उत्तर और दक्षिण यमन का एकीकरण हुआ।
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2014: ईरान समर्थित हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा किया।
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2015: सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ मोर्चा खोला।
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2019: गठबंधन के अंदर ही जंग शुरू हुई (सऊदी vs UAE समर्थित गुट)।
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2025: सऊदी अरब द्वारा अपने ही सहयोगी गुट (STC) पर बमबारी।
कौन किसके साथ? (यमन का उलझा हुआ गणित)
| पक्ष | समर्थक | लक्ष्य |
| हूती विद्रोही | ईरान | पूरे यमन पर कब्जा |
| यमन सरकार | सऊदी अरब | देश की एकता बनाए रखना |
| STC (अलगाववादी) | UAE | दक्षिण यमन को अलग देश बनाना |
गठबंधन में दरार का किसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच यह टकराव यमन को “दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट” बनाए रखेगा। इस गृहयुद्ध में अब तक 1.5 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अगर सऊदी गठबंधन और UAE समर्थित अलगाववादी आपस में ही भिड़ते रहे, तो इसका सबसे बड़ा फायदा हूती विद्रोहियों को मिलेगा, जो उत्तर में पहले से ही अपनी पकड़ मजबूत किए हुए हैं।
सवाल यह है कि क्या यमन एक देश के रूप में बचा रहेगा, या यह छोटे-छोटे युद्धग्रस्त राज्यों में सिमट जाएगा? फिलहाल, हद्रामौत की आग बुझती नजर नहीं आ रही है।
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