लंबे समय से चल रही बीमारी के बाद पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्यपाल सत्यपाल मलिक का 79 वर्ष की आयु में मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के दौरान जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे मलिक अपनी बेबाक राय और सरकार के प्रति आलोचनात्मक टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे।
सत्यपाल मलिक का परिवार और शिक्षा
सत्यपाल मलिक फैमिली की बात करें तो वे एक किसान परिवार से थे और जाट समुदाय से आते थे। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर देश के चार राज्यों के राज्यपाल के पद तक पहुंचा। सत्यपाल मलिक एजुकेशन के बारे में कम ही जानकारी उपलब्ध है, लेकिन वे हमेशा किसानों के मुद्दों के प्रति जागरूक और सक्रिय रहे।
साधारण जीवन, महत्वपूर्ण राजनीतिक यात्रा
गवर्नर सत्यपाल मलिक के रूप में उनका कार्यकाल 2017 से 2022 तक पांच वर्षों में चार राज्यों में रहा। मलिक के पास ज्यादा संपत्ति नहीं थी। उनके पास केवल एक कमरे का फ्लैट था, जिसे उन्होंने अपनी पेंशन की किस्तों से खरीदा था। इस सादगी भरे जीवन के बावजूद, राजनीति में उनका प्रभाव महत्वपूर्ण रहा।
1974 में चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल से विधायक बनकर उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। बाद में वे लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी रहे। सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक जीवन में कई दलों जैसे जनता दल, कांग्रेस, लोक दल, समाजवादी पार्टी और भाजपा में रहे। 2012 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
राज्यपाल के रूप में विवादास्पद कार्यकाल
राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल विवादों से भरा रहा, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के दौरान। बाद के वर्षों में, उन्होंने पुलवामा हमले और किसान आंदोलन पर सरकार की आलोचना की, जिससे वे सुर्खियों में रहे।
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। खड़गे ने उन्हें “किसान हितैषी नेता” बताते हुए श्रद्धांजलि दी, जबकि राहुल गांधी ने उन्हें “निडर होकर सत्य बोलने वाला व्यक्ति” करार दिया।
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