हिमाचल प्रदेश की राजनीति इन दिनों बेहद गर्म है। ऊना सदर से कांग्रेस के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा की एक फेसबुक पोस्ट ने पूरे राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है। आशु पुरी मर्डर केस को लेकर भाजपा नेताओं के आरोपों के बाद, रायजादा अब खुलकर पलटवार के मूड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जो भी उनके ऊपर, उनके कार्यकर्ताओं या उनके विधानसभा क्षेत्र पर उंगली उठाएगा, उसे उसी अंदाज़ में जवाब दिया जाएगा—चाहे वो कांग्रेस से हो या भाजपा से।
देर रात की फेसबुक पोस्ट से बढ़ी बेचैनी
सतपाल रायजादा ने देर रात एक पोस्ट शेयर की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। उन्होंने लिखा कि कुछ नेता हत्याकांड के बहाने उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। दावा किया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के कुछ नेता आपस में मिलकर उन्हें बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं।
रायजादा ने पोस्ट में बड़ा दावा किया—
“विधानसभा सत्र के बाद मैं ठोस सबूतों के साथ बड़ा खुलासा करूंगा।”
उनके इस बयान के बाद सियासी समीकरण और भी पेचीदा हो गए हैं। विपक्ष जहां उन्हें कटघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं उनके समर्थक इस पोस्ट को “सियासी पलटवार” के रूप में देख रहे हैं।
“सम्मान के लिए राजनीति में आया हूं, कोई ठेस नहीं सहूंगा”
रायजादा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वे मान-सम्मान के साथ राजनीति में आए थे। अगर कोई उनके सम्मान को चोट पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें हर आरोप का सबूतों के साथ जवाब देना आता है और आने वाले दिनों में वे पूरा मामला जनता के सामने रख देंगे।
इसके बाद विरोधियों में बेचैनी साफ दिख रही है। राजनीतिक निर्देश, पार्टी लाइन और पुराने समीकरण सब कुछ इस मामले के बाद बदलते दिख रहे हैं।
सत्ती बनाम रायजादा: सियासी तकरार तेज
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ऊना सदर से भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने आशु पुरी मर्डर केस के बाद रायजादा पर गंभीर आरोप लगाए।
सत्ती ने आरोप लगाया कि रायजादा होटल और रिसॉर्ट में अवैध गतिविधियाँ चल रही थीं। इस आरोप के बाद कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी बहस तेज हो गई।
रायजादा ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए सत्ती को कानूनी नोटिस भेज दिया और 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सत्ती राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने पलटवार किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में गुंडागर्दी चरम पर थी और पुलिस में मामलों तक को दर्ज नहीं किया जाता था।
क्या है पूरा मामला?
19 नवंबर को ऊना के लालसिंघी में कांग्रेस नेता आशु पुरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना होटल के बाहर उस समय हुई जब होटल में दो अलग-अलग बर्थडे पार्टियां चल रही थीं। बाहर अचानक गोलियां चलीं, जिसमें आशु पुरी की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए।
इस वारदात के बाद कांग्रेस के दो गुटों के बीच खुली जंग शुरू हो गई। भाजपा ने इस मौके को भुनाते हुए सीधे रायजादा को कटघरे में खड़ा कर दिया, जिसके बाद से मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
अब सबकी नजरें किस पर?
रायजादा जिन “ठोस सबूतों” का जिक्र कर रहे हैं, वे क्या हैं?
क्या वे सच में कुछ बड़ा खुलासा करेंगे?
क्या इससे हिमाचल की राजनीति में नया मोड़ आएगा?
यह सब विधानसभा सत्र के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन इतना तय है कि रायजादा की पोस्ट ने विपक्ष ही नहीं, अपनी ही पार्टी के नेताओं की नींद उड़ा दी है।
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