कर्नल ग़द्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल-इस्लाम की सरेआम हत्या! गोलियों से छलनी किया शरीर, लीबिया में मचा हड़कंप

सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी की हत्या: लीबिया में हड़कंप

त्रिपोली: लीबिया की राजनीति से इस वक्त एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। कभी लीबिया के सबसे ताकतवर शख्स रहे कर्नल मुअम्मर ग़द्दाफ़ी के बेटे और उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह खबर सामने आते ही उत्तरी अफ़्रीकी देश लीबिया समेत अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

घर में घुसकर किया हमला: क्या है पूरा मामला?

लीबियाई न्यूज़ एजेंसी ने सैफ़ अल-इस्लाम की सुरक्षा टीम के प्रमुख के हवाले से इस चौंकाने वाली मौत की पुष्टि की है। उनके वकील ने समाचार एजेंसी एएफ़पी (AFP) को बताया कि यह हमला बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। जानकारी के मुताबिक, ज़िंटान शहर में स्थित उनके घर पर चार हथियारबंद हमलावरों ने धावा बोल दिया और सैफ़ अल-इस्लाम पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं।

हालांकि, इस हमले के पीछे किसका हाथ है और हमलावर किस संगठन से जुड़े थे, इसे लेकर अभी तक रहस्य बना हुआ है। किसी भी गुट ने इस हत्याकांड की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इस घटना ने लीबिया के अस्थिर हालात को एक बार फिर दुनिया के सामने ला खड़ा किया है।

बहन का दावा: मौत की जगह पर सस्पेंस!

जहां एक तरफ उनके वकील ज़िंटान में हत्या की बात कह रहे हैं, वहीं सैफ़ अल-इस्लाम की बहन ने एक अलग ही दावा कर मामले को और पेचीदा बना दिया है। लीबियाई टीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके भाई की मौत ज़िंटान में नहीं, बल्कि लीबिया-अल्जीरिया सीमा के पास हुई है। मौत की जगह को लेकर आए इन दो अलग-अलग दावों ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, जिसकी जांच की जा रही है।

कभी खौफ का दूसरा नाम थे सैफ़ अल-इस्लाम

1972 में जन्मे सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी अपने पिता मुअम्मर ग़द्दाफ़ी के बाद देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति थे। कर्नल ग़द्दाफ़ी ने 1969 से 2011 तक करीब 42 साल लीबिया पर लोहे के हाथ से शासन किया। उस दौर में सैफ़ का नाम ही लोगों के मन में खौफ पैदा करने के लिए काफी था। हालांकि, उन्होंने साल 2000 के बाद पश्चिमी देशों के साथ लीबिया के रिश्तों को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसके कारण कई लोग उन्हें एक ‘सुधारवादी चेहरा’ भी मानने लगे थे।

विवादों और जेल से रहा पुराना नाता

2011 के विद्रोह के दौरान जब कर्नल ग़द्दाफ़ी को सत्ता से बेदखल कर मार दिया गया, तब सैफ़ अल-इस्लाम पर प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से कुचलने के गंभीर आरोप लगे। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने उनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए वारंट जारी किया था।

ग़द्दाफ़ी की मौत के बाद, सैफ़ को एक विद्रोही मिलिशिया ने पकड़ लिया और करीब छह साल तक ज़िंटान में कैद रखा। 2015 में एक लीबियाई अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई थी। हालांकि, 2021 में उन्होंने फिर से मुख्यधारा की राजनीति में लौटने की कोशिश की और राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का ऐलान किया, लेकिन वे चुनाव कभी हो ही नहीं पाए।

विरासत की जंग और अधूरा सपना

सैफ़ अल-इस्लाम अक्सर कहते थे कि वे सत्ता को विरासत में नहीं लेना चाहते। उनका एक मशहूर बयान था— “सत्ता की बागडोर कोई खेत नहीं है जिसे विरासत में लिया जाए।” इसके बावजूद, वे हमेशा से ही लीबिया की सत्ता का केंद्र बने रहना चाहते थे। उनकी मौत के साथ ही ग़द्दाफ़ी परिवार के उस आखिरी प्रभावशाली अध्याय का भी अंत होता दिख रहा है जो लीबिया की सत्ता पर दोबारा काबिज होने का सपना देख रहा था।

वर्तमान में लीबिया की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और इस हत्या के बाद वहां एक बार फिर गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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