15 साल पुराना वादा निभाने उतरे Sachin, Gursharan की कहानी सुनकर आप भी हो जाएंगे इमोशनल

15 साल पुराना वादा निभाने उतरे Sachin, Gursharan की कहानी सुनकर आप भी हो जाएंगे इमोशनल

पूर्व भारतीय क्रिकेटर Sachin Tendulkar हाल ही में मुंबई में हुए Ageas Federal Life Insurance के एक इवेंट में पहुंचे तो मंच पर पहुंचते ही पुरानी यादों का सिलसिला शुरू हो गया। बातचीत के दौरान उन्होंने एक ऐसे वादे की कहानी सुनाई, जो 15 साल पुराना था, लेकिन जिसे निभाने के लिए उन्होंने हर हाल में अपना शब्द पूरा किया।

क्रिकेट की दुनिया में रिकॉर्ड, रन और ट्रॉफियां बहुत दिखती हैं, लेकिन कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो इंसानियत, कमिटमेंट और रिश्तों की नींव पर खड़े होते हैं। Tendulkar के लिए भी ये कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसमें सिर्फ एक सेंचुरी की नहीं, बल्कि एक टूटे हुए हाथ से की गई हिम्मत और निभाए गए वादे की बात है।

1989 का Irani Cup और एक ‘टूटी उंगली’ वाला योद्धा

साल 1989। Irani Cup में Rest of India की टीम Delhi के खिलाफ खेल रही थी। उस वक्त Sachin अभी बहुत युवा थे, भारतीय टीम के दरवाजे पर दस्तक दे रहे थे। उसी मैच में टीम के उप-कप्तान Gursharan Singh की उंगली पहली पारी में fracture हो गई। डॉक्टरी सलाह साफ थी – उन्हें बल्लेबाजी नहीं करनी चाहिए।

लेकिन दूसरी पारी में हालात ऐसे बने कि Rest of India के नौ विकेट गिर चुके थे। Sachin क्रीज पर टिके हुए थे और 85 रन पर खेल रहे थे। तभी टीम के मैनेजमेंट की तरफ से, खास तौर पर दिवंगत Raj Singh Dungarpur की ओर से, Gursharan से कहा गया कि वे “एक हाथ” से बल्लेबाजी करने के लिए उतरें, ताकि Sachin को समय और मौका मिल सके अपनी सेंचुरी पूरी करने का।

Gursharan ने दर्द को किनारे रखकर पैड बांधे, क्रीज पर उतरे और दूसरी छोर पर डटे रहे। इसी दौरान Tendulkar ने अपना शतक पूरा किया। यही पारी आगे चलकर उनके लिए भारतीय टीम में एंट्री का बड़ा सबूत बनी। आज भले ही Sachin के नाम अनगिनत रिकॉर्ड हों, लेकिन इस पारी के पीछे Gursharan का योगदान वह कभी नहीं भूले।

‘ये मेरा ट्रायल मैच था, और Gushi ने मेरा साथ दिया’

इवेंट के दौरान इस किस्से को याद करते हुए Sachin ने कहा कि वह Irani Cup मुकाबला उनके लिए भारतीय टीम में जगह बनाने का ट्रायल जैसा था। उन्होंने बताया कि Gursharan को उस पारी में बल्लेबाजी करने की कोई मजबूरी नहीं थी, लेकिन Raj Singh की बात मानते हुए वे टूटी उंगली के बावजूद क्रीज पर आए और आखिरी तक डटे रहे, जिससे उन्हें अपना 100 पूरा करने का मौका मिला और इसके बाद ही भारत की टीम में उनका चयन हुआ।

Sachin ने याद किया कि बाद में Gursharan खुद भी भारतीय टीम का हिस्सा बने। वहीं, जब वे टीम में एक-साथ थे, तब Tendulkar ने उन्हें कई बार उस साहस के लिए धन्यवाद दिया। उनके लिए यह सिर्फ एक रन या एक शतक का मामला नहीं था, बल्कि एक साथी खिलाड़ी की नीयत और attitude ने उनका दिल जीत लिया था।

New Zealand में किया एक वादा: ‘Benefit match में ज़रूर आऊंगा’

यही नहीं, Sachin ने आगे बताया कि उस दौर में रिटायर हो चुके खिलाड़ियों के लिए benefit matches आयोजित किए जाते थे। New Zealand के दौरे पर ही उन्होंने Gursharan से मज़ाक-मज़ाक में लेकिन पूरे दिल से कहा था – “Gushi, एक न एक दिन तुम भी रिटायर हो जाओगे, हमेशा तो खेल नहीं सकते। जिस दिन तुम्हारा benefit match होगा, मैं वादा करता हूं, उसमें खेलने जरूर आऊंगा।”

यह बात 1990 की है। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह हल्की-सी लगने वाली बातचीत एक दिन इतने बड़े वादे का रूप ले लेगी। लेकिन Sachin के लिए यह सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि commitment था, जिसे वे दिल से मान चुके थे।

15 साल बाद फोन आया… और Sachin ने अपना वादा निभा दिया

साल बीतते गए, करियर आगे बढ़ता गया, लेकिन यह बात Sachin के दिल में जस की तस रही। फिर 2005 में एक दिन Gursharan का फोन आया। उन्होंने बताया कि अगले साल उनका benefit match होने वाला है और पूछा कि क्या Sachin उस मैच में खेलने आ पाएंगे।

Tendulkar ने बिना देर किए उन्हें वही पुरानी बात याद दिलाई – “Gushi, मैंने तुम्हें New Zealand (1990) में वादा किया था कि तुम्हारे benefit match में खेलूंगा। 15 साल बाद अब जब तुमने benefit match रखा है, तो मैं ज़रूर आऊंगा। That’s my promise.”

पूर्व भारतीय कप्तान ने मुस्कुराते हुए बताया कि वे उस मैच में खेले और इस तरह उन्होंने अपना वादा पूरा किया। मंच पर बैठे Sachin ने कहा कि ऐसे लम्हे आज भी उनके साथ हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है कि जो वादा उन्होंने किया था, उसे पूरा करके दिखाया।

क्रिकेट के मैदान पर रन और रिकॉर्ड भले सुर्खियां बटोरते हों, लेकिन ऐसी कहानियां बताती हैं कि असली greatness सिर्फ खेल में नहीं, इंसान के शब्द और उसके निभाए हुए वादों में बसती है। और Sachin–Gursharan की यह कहानी उसी इंसानियत और भरोसे की मिसाल है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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