मॉस्को/नई दिल्ली: भूमध्य सागर की गहराइयों में एक ऐसी घटना हुई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों और जासूसी एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। रूस का एक विशाल मालवाहक जहाज, ‘उर्सा माजो’ (Ursa Major), एक रहस्यमय विस्फोट के बाद समंदर में समा गया है। दावा किया जा रहा है कि इस जहाज पर बेहद गुप्त परमाणु रिएक्टर लदे थे, जो उत्तर कोरिया भेजे जा रहे थे। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना के तार भारत के सबसे महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।
क्या यह महज हादसा है या कोई गहरी साजिश?
स्पेनिश अखबार ‘ला वेरदाद’ की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, 23 दिसंबर 2024 को कार्टाजेना के तट से करीब 60 मील दूर समंदर में एक जोरदार धमाका हुआ और रूसी जहाज डूब गया। स्पेनिश समुद्री जांच रिपोर्ट (8059/24-Escora) में कुछ ऐसे खुलासे हुए हैं जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसे लगते हैं।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, जहाज पर दो ऐसे भारी कंटेनर थे जिनका जिक्र आधिकारिक कागजात (Manifest) में कहीं नहीं था। इन्हें नीले तिरपाल से ढककर छिपाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ये VM-4SG न्यूक्लियर रिएक्टर के ढांचे थे। रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया है कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि पानी के नीचे से किया गया एक सटीक हमला था।
सुपरकैविटेटिंग टॉरपीडो का इस्तेमाल?
सीस्मिक डेटा (Seismic data) से पता चला है कि जहाज में हुआ विस्फोट 20 से 50 किलो टीएनटी (TNT) के बराबर घातक था। शक की सुई सुपरकैविटेटिंग टॉरपीडो की तरफ घूम रही है। जहाज का रास्ता भी काफी संदिग्ध था। सेंट पीटर्सबर्ग से व्लादिवोस्तोक जाने के नाम पर निकला यह जहाज 15,000 किलोमीटर का असामान्य चक्कर लगा रहा था, जो सीधे उत्तर कोरिया के रेसॉं पोर्ट (Rason Port) की ओर इशारा करता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? क्या है अरिहंत कनेक्शन?
अब सवाल उठता है कि इस रूसी जहाज के डूबने से भारत का क्या लेना-देना? रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘उर्सा माजो’ पर जो VM-4SG रिएक्टर ले जाए जा रहे थे, वही तकनीक भारत की अरिहंत-क्लास (Arihant-class) परमाणु पनडुब्बियों के ‘प्रोपल्शन यूनिट’ का आधार है।
डिफेंस एनालिस्ट प्लेटफॉर्म ‘bmpd’ का दावा है कि भारत की अरिहंत पनडुब्बियों में लगा CLWR-B1 रिएक्टर, रूसी VM-4SG डिजाइन पर ही आधारित है। हालांकि भारत इसे ‘स्वदेशी’ कहता है, लेकिन रक्षा गलियारों में यह चर्चा आम है कि रिएक्टर के कई महत्वपूर्ण हिस्से, जैसे ‘रिएक्टर वेसल’ (Hull), आज भी रूस से ही आते हैं।
अगर यह रिपोर्ट सही है, तो सवाल उठता है कि क्या भारत अपनी सामरिक सुरक्षा के लिए आज भी पूरी तरह रूस पर निर्भर है? और क्या इस सप्लाई चेन में कोई बाधा आने से भारत के प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है?
अमेरिका और नाटो पर शक की सुई
रिटायर्ड फाइटर पायलट और मिलिट्री एनालिस्ट विजयेन्द्र के. ठाकुर ने ‘यूरेशियन टाइम्स’ में एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि हो सकता है कि US या NATO की किसी पनडुब्बी ने इस जहाज को जानबूझकर निशाना बनाया हो। मकसद साफ था—उत्तर कोरिया को परमाणु पनडुब्बी (SSN/SSBN) क्षमता हासिल करने से रोकना।
हालांकि, रूस या किसी अन्य देश ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस धमाके की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। लेकिन समंदर के नीचे दबे ये रिएक्टर आने वाले समय में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दे सकते हैं।








