बुखारेस्ट/कीव: रूमानिया की हवाई सीमा में शनिवार शाम अचानक हलचल मच गई, जब एक संदिग्ध रूसी ड्रोन ने वहां प्रवेश किया। तुरंत ही रूमानियाई सेना ने अपनी F-16 लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर भेजा। इस घटना ने न केवल रूमानिया बल्कि पूरे नाटो (NATO) गठबंधन में चिंता बढ़ा दी है।
कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?
रूमानिया के रक्षा मंत्रालय और यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 13 सितंबर को शाम 6:05 बजे फेतेश्टी (Fetești) स्थित 86वें एयरबेस से दो F-16 फाइटर जेट्स उड़ान भरते हैं। उनका मिशन था – यूक्रेन की सीमा पर हो रहे रूसी हवाई हमलों की निगरानी करना।
करीब 6:23 बजे रडार पर एक ड्रोन दिखाई दिया। F-16 विमानों ने इस ड्रोन का पीछा किया और लगभग 20 किलोमीटर तक उसे ट्रैक किया। रिपोर्ट के अनुसार, यह ड्रोन दक्षिण-पश्चिम दिशा में Chilia Veche क्षेत्र के पास रडार से गायब हो गया। राहत की बात यह रही कि यह ड्रोन किसी आबादी वाले इलाके से नहीं गुज़रा, इसलिए स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर सीधा खतरा नहीं था।
ड्रोन के मलबे की तलाश
रूमानियाई सेना ने कहा कि स्पेशलिस्ट टीमें किसी भी संभावित मलबे की तलाश के लिए तैयार हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह जांच महत्वपूर्ण है क्योंकि यह घटना सीधे तौर पर नाटो क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ी है।
नया कानून लेकिन अधूरा अमल
इस साल की शुरुआत में रूमानिया की संसद ने एक अहम कानून पास किया था। इसके तहत सेना को यह अधिकार दिया गया कि अगर गैरकानूनी तरीके से कोई ड्रोन रूमानिया की हवाई सीमा में प्रवेश करता है, तो उसे शांति काल में भी मार गिराया जा सकता है। हालांकि, अभी इस कानून के कार्यान्वयन संबंधी नियम तय नहीं हुए हैं, इसलिए सेना सीधे कार्रवाई करने से पहले सतर्क रह रही है।
ज़ेलेंस्की का बड़ा बयान
इस घटना पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा –
“यह कोई संयोग नहीं है। रूस ठीक-ठीक जानता है कि वे अपने ड्रोन कहां भेज रहे हैं।”
ज़ेलेंस्की के मुताबिक, यह ड्रोन लगभग 10 किलोमीटर तक रूमानिया की सीमा में गया और करीब 50 मिनट तक नाटो की हवाई सीमा में सक्रिय रहा। उन्होंने यह भी कहा कि पोलैंड ने भी इसी दिन रूसी ड्रोन खतरे को देखते हुए सैन्य प्रतिक्रिया दी।
बेलारूस से मिली मदद?
ज़ेलेंस्की ने आगे कहा कि शनिवार को पूरे दिन रूसी ड्रोन यूक्रेन के कई हिस्सों में मंडराते रहे, खासकर उत्तरी क्षेत्रों में, जो बेलारूस की सीमा से सटे हुए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा में प्रवेश करने के लिए बेलारूस की हवाई सीमा का भी इस्तेमाल किया।
बढ़ा नाटो का दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस द्वारा बार-बार नाटो देशों की हवाई सीमा के पास इस तरह की गतिविधियाँ करना जानबूझकर किया जा रहा है। इससे नाटो पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है और यूक्रेन को भी संदेश जाता है कि रूस किसी भी हद तक जा सकता है।
रूमानिया, पोलैंड और बाल्टिक देश पहले से ही इस तनावपूर्ण स्थिति को लेकर अलर्ट पर हैं। इस घटना ने एक बार फिर से यूरोप में युद्ध के फैलने की आशंका को हवा दे दी है।
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