सिनेमा का वो पागलपन! जब बिना किसी नियम और परमिट के बनी थी वर्ल्ड क्लास फिल्म, अब सालों बाद खुलेगा राज

सिनेमा का वो पागलपन! जब बिना किसी नियम और परमिट के बनी थी वर्ल्ड क्लास फिल्म, अब सालों बाद खुलेगा राज

सिनेमा की दुनिया में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ पर्दे पर नहीं चलतीं, बल्कि इतिहास बदल देती हैं। 1960 में आई जीन-ल्यूक गोडार्ड की फिल्म ‘ब्रेथलेस’ (Breathless) ऐसी ही एक फिल्म थी। अब 65 साल बाद, मशहूर डायरेक्टर रिचर्ड लिंकलेटर अपनी नई फिल्म ‘नोवेल वैग’ (Nouvelle Vague) के जरिए उसी दौर और उस पागलपन को दोबारा पर्दे पर जिंदा कर रहे हैं। इस फिल्म में एक्ट्रेस जोई ड्यूच ने मुख्य भूमिका निभाई है, जिनकी परफॉर्मेंस की चर्चा हर तरफ हो रही है।

जब नियमों को तोड़ना ही बन गया नया नियम

रिचर्ड लिंकलेटर और जीन-ल्यूक गोडार्ड के बीच दशकों का फासला है, लेकिन दोनों में एक बात कॉमन है—सिनेमा के पुराने नियमों को न मानना। गोडार्ड ने जब ‘ब्रेथलेस’ बनाई थी, तब उनके पास न तो कोई परमिट था और न ही कोई तय शेड्यूल। उन्होंने सिर्फ 23 दिनों में शूटिंग पूरी कर दी। उनका मानना था कि एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए बस ‘एक लड़की और एक बंदूक’ की जरूरत होती है। इसी क्रांतिकारी सोच ने ‘फ्रेंच न्यू वेव’ को जन्म दिया।

लिंकलेटर की फिल्म ‘नोवेल वैग’ हमें गोडार्ड के उसी संघर्ष और जुनून की यात्रा पर ले जाती है। फिल्म में गोडार्ड का किरदार निभा रहे एक्टर गिलाउम मारबेक कहते हैं, “किसी फिल्म की आलोचना करने का सबसे अच्छा तरीका एक नई फिल्म बनाना है।” यह लाइन आज के दौर के फिल्म मेकर्स के लिए भी एक बड़ी सीख है।


जोई ड्यूच का ‘आइकॉनिक’ अवतार

फिल्म में जोई ड्यूच ने फ्रेंच न्यू वेव की आइकॉन जीन सीबर्ग का किरदार निभाया है। छोटे बाल (Pixie Cut), धारीदार टी-शर्ट और वो चुलबुला अंदाज़—जोई ने सीबर्ग को पर्दे पर दोबारा जीवंत कर दिया है। अपनी इस शानदार भूमिका के लिए उन्हें गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड के लिए नामांकित भी किया गया है।

हाल ही में जोई और लिंकलेटर के बीच हुई एक बातचीत में कई दिलचस्प बातें सामने आईं। जोई ने बताया कि 19 साल की उम्र में लिंकलेटर के साथ काम करने और अब 29 की उम्र में दोबारा साथ आने का अनुभव कैसा रहा। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए एक बेहतरीन मौका था कि मैं अपनी कला को और बेहतर तरीके से समझ सकूँ।”


शूटिंग के दौरान का ‘फ्रांसीसी’ रोमांच

इस फिल्म की शूटिंग फ्रांस में हुई, जहाँ लिंकलेटर और जोई इकलौते अमेरिकी थे। पूरी क्रू फ्रांसीसी थी। लिंकलेटर ने साझा किया कि भाषा की वजह से उन्हें कई बार यह समझ नहीं आता था कि सेट पर क्या समस्या चल रही है, लेकिन उन्होंने इसे एक ‘विजुअल आर्ट प्रोजेक्ट’ की तरह एन्जॉय किया।

फिल्म की खास बातें:


क्यों खास है यह फिल्म?

रिचर्ड लिंकलेटर का कहना है कि उन्होंने सालों पहले इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी थी, लेकिन इसे बनाने का सही समय अब आया। उन्होंने जोई ड्यूच से बहुत पहले ही कह दिया था, “तुम बिल्कुल जीन सीबर्ग जैसी दिखती हो, तुम यह रोल जरूर करोगी।”

आज के दौर में जहाँ फिल्में करोड़ों के बजट और भारी-भरकम VFX पर टिकी होती हैं, ‘नोवेल वैग’ हमें याद दिलाती है कि सिनेमा असल में कहानियों और उन्हें कहने के बेखौफ अंदाज का नाम है। यह फिल्म उन लोगों के लिए एक तोहफा है जो सिनेमा के इतिहास और उसकी बारीकियों को समझना चाहते हैं।

क्या लिंकलेटर की यह फिल्म ऑस्कर की रेस में भी अपनी जगह बना पाएगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल फिल्म प्रेमियों के बीच इसका क्रेज सातवें आसमान पर है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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