पुणे: कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी पचड़ों में घिरते नजर आ रहे हैं। सावरकर मानहानि मामले में पुणे की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने एक ऐसा आदेश दिया है, जिससे राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अदालत ने दिग्गज टेक कंपनियों यूट्यूब (YouTube) और गूगल (Google) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे राहुल गांधी के उस विवादित वीडियो के रिकॉर्ड पेश करें, जो इस पूरे केस की जड़ है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद विनायक दामोदर सावरकर के प्रपौत्र (Grand-Nephew) सत्यकी सावरकर द्वारा दायर की गई एक मानहानि याचिका से जुड़ा है। सत्यकी का आरोप है कि राहुल गांधी ने लंदन के एक कार्यक्रम में उनके दादा सावरकर के खिलाफ अपमानजनक और झूठी बातें कही थीं।
अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा कि जिन इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स की मांग की गई है, वे इस मामले की जांच और ट्रायल के लिए बेहद ‘प्रासंगिक और आवश्यक’ हैं। न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अदालत ने यूट्यूब और गूगल को आदेश दिया कि वे अपने अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से संबंधित वीडियो के मूल रिकॉर्ड पेश करें।
वीडियो का ‘गायब’ होना और कोर्ट का कड़ा रुख
इस केस में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब सावरकर पक्ष की ओर से पेश वकील संग्राम कोल्हटकर ने कोर्ट को बताया कि सबूत के तौर पर दी गई सीडी (CD) अचानक खाली (Blank) निकली। इतना ही नहीं, कुछ अन्य महत्वपूर्ण सीडी भी गायब पाई गईं। इसी वजह से अब कोर्ट ने सीधे गूगल और यूट्यूब से डेटा मांगा है ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
वो ‘विवादित’ वीडियो जिसे लेकर मचा है बवाल
यह आदेश राहुल गांधी के उस वीडियो से संबंधित है जिसका शीर्षक है— ‘Indians abroad are shining examples of our culture of respect, Interaction with diaspora in London’। इसे 5 मार्च 2023 को राहुल गांधी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था। सत्यकी सावरकर का दावा है कि इस वीडियो में राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर जो दावे किए हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं और इससे उनके परिवार की छवि को नुकसान पहुंचा है।
क्यों अहम है यह आदेश?
पुणे कोर्ट का यह कदम राहुल गांधी के लिए खतरे की घंटी हो सकता है क्योंकि अब डिजिटल साक्ष्य सीधे सोर्स (यूट्यूब) से मंगवाए जा रहे हैं। अगर यूट्यूब कोर्ट में यह रिकॉर्ड जमा करता है, तो इसे एक ठोस सबूत माना जाएगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि निष्पक्ष जांच के लिए इन डिजिटल रिकॉर्ड्स का होना अनिवार्य है।
अब देखना यह होगा कि यूट्यूब और गूगल इस पर क्या जवाब देते हैं और क्या राहुल गांधी की मुश्किलें इस कानूनी लड़ाई में और बढ़ने वाली हैं।
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