रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन राजनीति में आने से पहले उनकी पहचान कुछ और ही थी—एक तेजतर्रार KGB एजेंट की। रूस की खुफिया एजेंसी KGB अपने खतरनाक और रहस्यमयी ऑपरेशनों के लिए जानी जाती है, लेकिन उसके इतिहास में एक ऐसा मिशन भी है, जिसे सुनकर कोई भी हैरान हो जाए। यह मिशन जितना जोखिम भरा था, उतना ही मजेदार भी—क्योंकि इसमें एजेंटों ने एक पूरी भारी-भरकम मिसाइल को ठेले पर लादकर चोरी किया और फिर उसे मर्सीडीज कार में भरकर वहां से फरार हो गए।
क्यों है यह मिशन सबसे अनोखा?
दरअसल, यह घटना तब की है जब दुनिया शीत युद्ध के तनाव में जल रही थी। सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ही एक-दूसरे की सैन्य तकनीक पर पैनी नजर रखे हुए थे। ऐसे समय में KGB ने पश्चिमी देशों की एडवांस्ड वेपन टेक्नोलॉजी हासिल करने के लिए कई गुप्त ऑपरेशन चलाए। इन्हीं में से एक था—अमेरिका की AIM-9 साइडवाइंडर मिसाइल की चोरी। यह मिसाइल उस दौर में बेहद महत्वपूर्ण एयर-टू-एयर हथियार थी, जिसे अमेरिका आसानी से किसी और के हाथ नहीं लगने देना चाहता था।
लेकिन KGB इसे हासिल करने का प्लान पहले ही बना चुकी थी—और इस मिशन को अंजाम देने का तरीका किसी हॉलीवुड फिल्म से कम नहीं था।
जर्मन नागरिक भी बने ऑपरेशन का हिस्सा
22 अक्टूबर 1967 को यह मिशन पश्चिमी जर्मनी के एक सैन्य अड्डे पर शुरू हुआ। KGB एजेंट सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं हुए, बल्कि उन्होंने उन जर्मन नागरिकों की मदद ली जो जर्मन सिस्टम से नाराज़ थे। इनमें शामिल थे—जर्मन आर्किटेक्ट मैनफ्रेड रैमिंगर, पोलिश ड्राइवर जोसेफ लिनोव्स्की और जर्मन सैन्य पायलट वुल्फ-डाइटहार्ड क्नोपे।
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों ने घने कोहरे का फायदा उठाते हुए क्नोपे का बेस सिक्योरिटी पास इस्तेमाल किया और शाम के समय न्यूबर्ग एयर बेस में प्रवेश कर लिया। कोहरा इतना घना था कि कुछ ही दूरी पर खड़ा आदमी भी मुश्किल से दिखाई दे।
ठेला बना खुफिया एजेंटों का ‘हथियार’
बेस में घुसने के बाद तीनों सीधा गोला-बारूद डिपो तक पहुंचे, जहां AIM-9 मिसाइल रखी हुई थी। मिशन अब मुश्किल मोड़ पर था—मिसाइल बेहद भारी थी, और उसे चुपचाप बाहर निकालना आसान नहीं था। लेकिन यहीं आया प्लान का सबसे दिलचस्प हिस्सा।
उन्होंने मिसाइल को उठाया और एक हाथ-ठेले पर लाद दिया। सोचिए—एक खतरनाक एयर-टू-एयर मिसाइल, जिसका इस्तेमाल लड़ाकू विमान करते हैं, उसे चुपचाप ठेले पर रखकर रनवे पार किया जा रहा है! कोहरा इतना घना था कि गार्ड्स को भी इस ‘ठेला ऑपरेशन’ की भनक नहीं लगी।
मर्सिडीज में मिसाइल… लेकिन कैसे?
बेस के बाहर एक मर्सीडीज सेडान कार तैयार खड़ी थी। प्लान था कि मिसाइल को कार में ठूंसकर वहां से निकल जाएंगे। लेकिन समस्या हुई—मिसाइल कार में फिट ही नहीं हो रही थी। फिर क्या, कार के शीशे तोड़े गए और मिसाइल को ऐसे रखा गया कि उसका कुछ हिस्सा बाहर लटक रहा था।
और सबसे दिलचस्प बात—किसी को शक न हो इसलिए बाहर निकले हिस्से पर पोछे जैसा कपड़ा बांध दिया गया। ताकि लगे कि शायद कोई सामान रखा है। इतना ही नहीं, ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए उस हिस्से पर लाल कपड़ा भी बांधा गया, ताकि दूसरी गाड़ियों को साफ दिखे और कोई दुर्घटना न हो।
मिशन के बाद रैमिंगर मिसाइल को अपने ठिकाने पर ले गया। वहां उसके हिस्से अलग-अलग किए गए और फिर ये पार्ट्स मॉस्को भेजे गए। KGB के लिए यह ऑपरेशन एक बड़ी सफलता साबित हुआ।
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