पटियाला: पंजाब पुलिस के एक कद्दावर अधिकारी, जो अपराधियों के छक्के छुड़ाते थे, आज खुद एक ऐसी साजिश का शिकार हो गए कि उन्हें मौत को गले लगाने जैसा खौफनाक कदम उठाना पड़ा। पंजाब के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) अमर सिंह चहल द्वारा सुसाइड की कोशिश की खबर ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। यह कहानी सिर्फ एक गोली चलने की नहीं है, बल्कि उस ‘साइबर मायाजाल’ की है जिसमें एक बेहद अनुभवी अधिकारी भी फंस गया।
8 करोड़ की ठगी और कर्ज का बोझ
अमर सिंह चहल ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। गनीमत रही कि उनकी जान बच गई और पूर्व ADGP गुरिंदर सिंह ढिल्लों के मुताबिक अब वह खतरे से बाहर हैं। लेकिन, अस्पताल के बिस्तर पर लेटे इस पूर्व अफसर के पीछे छूटा है 12 पन्नों का वह विस्तृत सुसाइड नोट, जिसे उन्होंने अपनी ‘लास्ट अपील’ कहा है। इसमें 45 पॉइंट्स में उन्होंने उस 8 करोड़ रुपये की ठगी का जिक्र किया है, जिसने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।
कैसे बुना गया ठगी का जाल?
अमर सिंह चहल ने बताया कि वह एक व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े थे, जो खुद को DBS ग्रुप (सरकार और सेबी से मान्यता प्राप्त होने का दावा) से जुड़ा बताता था।
CEO बनकर आया ठग: ‘रजत वर्मा’ नाम के शख्स ने खुद को कंपनी का CEO बताया और रोजाना शेयर बाजार की सलाह देने लगा।
मुनाफे का लालच: शुरुआत में 40% मुनाफे का लालच दिया गया। भरोसा जीतने के लिए शुरू में छोटे-छोटे फायदे दिखाए गए।
नकली डैशबोर्ड: ठगों ने एक डिजिटल डैशबोर्ड बनाया था, जिसमें फर्जी तरीके से बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता था।
IPO और OTC का खेल: जब निवेश बढ़ गया, तो उन्हें IPO और मार्केट ऑवर्स के बाद होने वाली ‘OTC ट्रेडिंग’ में पैसा लगाने को मजबूर किया गया।
अपनों से लिया 7 करोड़ का उधार
सुसाइड नोट में छलका दर्द बताता है कि चहल की अपनी पूंजी सिर्फ 1 करोड़ रुपये थी। बाकी के 7 करोड़ रुपये उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिए थे। जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने ‘सर्विस फीस’ और ‘टैक्स’ के नाम पर 2.25 करोड़ रुपये और ऐंठ लिए। हद तो तब हो गई जब उनसे अधिकारियों को ‘रिश्वत’ देने के नाम पर भी पैसे मांगे गए।
“मैं पूरी तरह टूट चुका हूं। अब मैं न तो उधार चुका पा रहा हूं और न ही समाज में सिर उठाकर जी पा रहा हूं।” — अमर सिंह चहल (सुसाइड नोट से)
सुसाइड नोट की बड़ी बातें:
डिजिटल ट्रैप: ठगों ने मुंबई में बड़े इवेंट और सिंगापुर ट्रिप का झांसा दिया था।
परिवार की सुरक्षा: उन्होंने पंजाब पुलिस से विनती की है कि उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए और लेनदार उन्हें परेशान न करें।
संपत्ति बेचकर चुकाएंगे कर्ज: उन्होंने लिखा कि उनका परिवार जमीन बेचकर लोगों का पैसा लौटाने की कोशिश करेगा।
SIT की मांग: चहल ने इस पूरे मामले की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) या CBI जांच की मांग की है।
विवादों से भी रहा है नाता
अमर सिंह चहल का नाम केवल इस घटना के लिए ही चर्चा में नहीं रहा। वह 2015 के बहुचर्चित बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड में भी नामजद थे। इस मामले की चार्जशीट में प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल जैसे बड़े राजनेताओं के साथ उनका नाम भी शामिल था।
आज यह घटना हर नागरिक के लिए एक चेतावनी है। अगर एक पूर्व आईजी स्तर का अधिकारी साइबर ठगों के झांसे में आ सकता है, तो आम आदमी को कितना सतर्क रहने की जरूरत है, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
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