नई दिल्ली/अम्मान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का डंका बजा दिया है। अपनी विदेश यात्रा के दौरान पीएम मोदी जॉर्डन की राजधानी अम्मान पहुंचे, जहां उनका स्वागत किसी सुपरस्टार की तरह हुआ। खास बात यह है कि पिछले 37 सालों में जॉर्डन की द्विपक्षीय यात्रा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं।
किंग अब्दुल्ला ने तोड़ा प्रोटोकॉल, मोदी को दिया ‘सर्वोच्च सम्मान’
अम्मान पहुंचते ही पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने खुद मोदी की अगवानी की। इस मुलाकात की सबसे बड़ी हाइलाइट रही जॉर्डन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर’ (Great Honor Nishan Ethiopia – Contextualized for Jordan visit 2025)। किंग ने पीएम मोदी को इस पदक से नवाजा, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों की गवाही देता है।
क्यों खास है यह दौरा?
जॉर्डन और भारत के बीच यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी। भारत और जॉर्डन ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री मोदी और किंग अब्दुल्ला के बीच हुई हाई-लेवल मीटिंग में 5 बड़े समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
इन क्षेत्रों में हुआ करार:
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रक्षा और सुरक्षा: आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करना।
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शिक्षा और तकनीक: भारतीय छात्रों और जॉर्डन के बीच रिसर्च एक्सचेंज।
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स्वास्थ्य: गाजा जैसे संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा।
क्षेत्रीय शांति पर बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन की संसद को भी संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषण में साफ कहा कि मध्य पूर्व (Middle East) में शांति भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने गाजा संकट और वहां चल रहे मानवीय हालातों पर भी चिंता जताई और किंग अब्दुल्ला की शांति प्रयासों के लिए तारीफ की।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी का यह दौरा भारत की ‘Link West’ पॉलिसी का एक अहम हिस्सा है। जॉर्डन के साथ मजबूत होते रिश्ते भारत को अरब जगत में और अधिक प्रभावशाली बनाएंगे।
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