हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अपना एक अलग और विशेष महत्व है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है—’पाप’ और ‘मोचनी’ यानी पापों से मुक्ति दिलाने वाली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपवास करने पर जाने-अनजाने में हुए सभी पापों का नाश होता है।
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साल 2026 में पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च, रविवार को रखा जाएगा। इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए तुलसी पूजन और तुलसी चालीसा के पाठ का बड़ा महत्व बताया गया है।
श्रीहरि की कृपा के लिए तुलसी चालीसा का पाठ
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें ‘हरिप्रिया’ भी कहा जाता है। एकादशी के दिन यदि आप श्रीहरि को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो तुलसी चालीसा का पाठ अवश्य करें।
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।।श्री तुलसी चालीसा।।
(दोहा) श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।
(चौपाई) नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी। दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।। विष्णुप्रिया जय जयति भवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी। भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।। जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा। करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।। कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा। तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।। कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी। वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।। श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई। कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।। छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी। तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।। औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता। देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।। वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया। नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।। नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी। नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।। नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि। नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।। नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि। जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।। निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ। करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।। शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं। करहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।। मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।। बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा। प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।। चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे। करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।। पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की। यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।। करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं। है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
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(दोहा) तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।। यह श्री तुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।
पापमोचनी एकादशी 2026: शुभ तिथि और मुहूर्त
अगर आप भी इस साल यह व्रत रखने जा रहे हैं, तो तिथियों का सही समय नोट कर लें:
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एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 मार्च 2026, शनिवार को सुबह 08:11 बजे से।
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एकादशी तिथि समापन: 15 मार्च 2026, रविवार को सुबह 09:17 बजे तक।
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व्रत की मुख्य तारीख: हिंदू धर्म में ‘उदयातिथि’ को विशेष माना जाता है। चूंकि 15 मार्च को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी, इसलिए व्रत 15 मार्च को ही रखा जाएगा।
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पारण का समय: व्रत खोलने (पारण) का शुभ समय 16 मार्च की सुबह रहेगा।
इन 4 गलतियों से बचें, वरना नहीं मिलेगा फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के कुछ कड़े नियम होते हैं। यदि इनका पालन न किया जाए, तो पुण्य फल कम हो सकता है:
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चावल का त्याग: पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना है। माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करना अशुद्धि को न्यौता देना है।
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क्रोध और बुराई से दूरी: यह दिन आत्म-शुद्धि का है। किसी पर गुस्सा करना, झगड़ा करना या किसी की पीठ पीछे निंदा करना आपके मानसिक पुण्य को नष्ट कर सकता है।
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तुलसी के पत्ते न तोड़ें: तुलसी विष्णु जी को प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन उन्हें तोड़ना वर्जित है। यदि पूजा के लिए पत्तों की जरूरत है, तो उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
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तामसिक भोजन का परहेज: इस दिन घर में लहसुन, प्याज या मांसाहारी भोजन बिल्कुल न लाएं। यहां तक कि जो लोग व्रत नहीं रख रहे, उन्हें भी सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
कैसे करें सरल पूजा?
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सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद पीले कपड़े पहनें।
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भगवान विष्णु के ‘चतुर्भुज’ रूप के सामने दीपक जलाएं।
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उन्हें पीले फूल, मौसमी फल और पंचामृत का भोग लगाएं।
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पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में आरती करें।
यह एकादशी आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर करने का एक सुनहरा अवसर है। पूरी श्रद्धा के साथ श्रीहरि की आराधना करें।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
