Current date 21/03/2026

गाजा में कदम रखेगी पाकिस्तानी सेना? ट्रंप के मास्टरप्लान पर इस्लामाबाद ने चली बड़ी चाल, सुनकर उखड़ सकता है अमेरिका!

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मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना ’20-सूत्रीय शांति प्लान’ पेश कर दिया है। इस योजना का सबसे अहम और विवादित हिस्सा है गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की तैनाती। अब खबर आ रही है कि पाकिस्तान ने इस बल में अपने सैनिक भेजने की पेशकश की है, लेकिन इसके साथ ही ऐसी शर्तें लगा दी हैं जिन्हें सुनकर वाशिंगटन में हलचल तेज हो सकती है।

इशाक डार की दोटूक: “शांति बनाएंगे, थोपेंगे नहीं”

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए इसे ‘अत्यंत संवेदनशील’ करार दिया है। ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों से बात करते हुए डार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान गाजा जाने को तैयार तो है, लेकिन उसका रोल बेहद सीमित होगा।

इशाक डार ने कहा, “हमने साफ कर दिया है कि अगर इस मिशन का मकसद ‘शांति स्थापना’ (Peacekeeping) है, तो हम इसका हिस्सा बनेंगे। लेकिन अगर बात ‘शांति थोपने’ (Peace Enforcement) की आई, तो पाकिस्तान पीछे हट जाएगा।” पाकिस्तान का सीधा मतलब यह है कि उसकी सेना वहां केवल सुरक्षा व्यवस्था में मदद करेगी, किसी युद्ध या सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगी।

हमास और हथियारों पर पाकिस्तान का ‘पेंच’

इस योजना में सबसे बड़ा पेंच हमास को लेकर है। इशाक डार ने कहा कि अगर मिशन के जनादेश (Mandate) में हमास को जबरन निरस्त्र करने जैसा कोई प्रावधान हुआ, तो पाकिस्तान खुशी-खुशी इससे किनारा कर लेगा। उनका तर्क है कि गाजा में शासन चलाना और वहां के संगठनों को संभालना फिलिस्तीनी प्राधिकरण या वहां की स्थानीय सरकार का काम है, पाकिस्तान की सेना इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्या कहा था?

इससे पहले 19 दिसंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बात की पुष्टि की थी कि पाकिस्तान ने ट्रंप के शांति ढांचे के तहत सैनिक भेजने की इच्छा जताई है। रुबियो ने पाकिस्तान की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा था, “हम पाकिस्तान के इस प्रस्ताव और इस पर विचार करने की उनकी इच्छा के लिए बहुत आभारी हैं।”

हालांकि, रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि अभी कुछ और सवालों के जवाब बाकी हैं। अमेरिका चाहता है कि एक ऐसी सेना तैयार हो जो इजरायल और फिलिस्तीन दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो। रुबियो को भरोसा है कि पाकिस्तान के अलावा और भी कई देश इस बल का हिस्सा बनने के लिए आगे आएंगे।

क्या अमेरिका मानेगा पाकिस्तान की शर्तें?

ट्रंप का प्लान गाजा को फिर से बसाने और वहां स्थाई शांति लाने के लिए है, लेकिन इसके लिए हमास का प्रभाव कम करना अमेरिका और इजरायल की पहली शर्त है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान अपनी मुस्लिम वर्ल्ड की छवि को बचाने के लिए हमास के खिलाफ किसी भी सीधी कार्रवाई से बचना चाहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका पाकिस्तान की इन ‘सॉफ्ट’ शर्तों को स्वीकार करेगा या फिर किसी और देश की ओर देखेगा?

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि गाजा में शांति का रास्ता जितना कठिन है, उतनी ही उलझी हुई इसकी कूटनीति है।


अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • Chetan Pawar

    चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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Chetan

चेतन पवार को शोधपरक लेखन में विशेष रुचि है। वर्तमान में वे हिंदी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए लेखन करते हैं, जहाँ वे समाचार और जानकारियों को स्पष्टता, सटीकता और सही संदर्भों के साथ पाठकों तक पहुँचाते हैं। जटिल विषयों को सरल और प्रभावी हिंदी में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की पहचान है।

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