गाजा में पाकिस्तानी सेना की एंट्री? जनरल असीम मुनीर ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त, मांग ली पूरी कमान!

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इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: गाजा पट्टी में महीनों से जारी जंग के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान अब गाजा में अपनी सेना तैनात करने की फिराक में है, लेकिन उसने इसके लिए अमेरिका के सामने एक ऐसी शर्त रख दी है जिसने सबको हैरान कर दिया है। पाकिस्तान सिर्फ अपनी फौज भेजना नहीं चाहता, बल्कि वह चाहता है कि गाजा में बनने वाली ‘इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स’ (ISF) की पूरी कमान उसके हाथों में हो।

क्या है जनरल मुनीर का ‘मास्टर प्लान’?

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और अमेरिकी अधिकारियों के बीच इसे लेकर लगातार बातचीत चल रही है। पाकिस्तान का प्रस्ताव है कि यदि गाजा में शांति बहाली के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय फोर्स तैनात की जाती है, तो उसका नेतृत्व एक सीनियर पाकिस्तानी जनरल करे। यानी पाकिस्तान गाजा में ‘बॉस’ की भूमिका निभाना चाहता है।

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की यह दिलचस्पी केवल शांति बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी कूटनीतिक और आर्थिक चालें छिपी हैं। पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह गाजा में तभी कदम रखेगा जब उसे बदले में भारी-भरकम ‘इनाम’ मिलेगा।

अमेरिका के साथ बढ़ी नजदीकियां, मार्को रुबियो से भी संपर्क!

हाल के दिनों में अमेरिका और पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के बीच मुलाकातों का दौर तेज हो गया है। खबर है कि जनरल मुनीर जल्द ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर से मिल सकते हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन के संभावित विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी संपर्क साधा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी गाजा में जल्द से जल्द स्थिरता चाहते हैं, और पाकिस्तान इसी मौके का फायदा उठाकर खुद को मध्य-पूर्व के बड़े खिलाड़ी के रूप में पेश कर रहा है।

पाकिस्तान की 4 बड़ी शर्तें: बिना ‘फायदे’ के नहीं जाएगी फौज

पाकिस्तान ने इस मिशन में शामिल होने के लिए अमेरिका और अरब देशों के सामने अपनी मांगों की लंबी लिस्ट रख दी है:

  1. टू-स्टेट सॉल्यूशन: पाकिस्तान चाहता है कि इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर दुनिया ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ (Two-State Solution) के लिए सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताए।

  2. भारी आर्थिक मदद: कंगाली से जूझ रहा पाकिस्तान चाहता है कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और अमेरिका उसे बड़ा निवेश और सहायता पैकेज दें।

  3. पुरानी दोस्ती की बहाली: पाकिस्तान ने मांग की है कि अमेरिका उसे फिर से ‘मेजर नॉन-नाटो एलाय’ (MNNA) का दर्जा दे और सैन्य ट्रेनिंग व हथियारों की सप्लाई फिर से शुरू करे।

  4. इजरायल से गारंटी: भारत और इजरायल की नजदीकी को देखते हुए पाकिस्तान ने इजरायल से सुरक्षा आश्वासन मांगा है ताकि उसकी सेना पर कोई खतरा न आए।

मुनीर का मिडिल ईस्ट दौरा और ‘रणनीतिक दांव’

जनरल मुनीर ने हाल ही में सऊदी अरब, जॉर्डन, मिस्र और लीबिया का दौरा किया था। पहले इसे सामान्य दौरा माना जा रहा था, लेकिन अब साफ हो रहा है कि ये सब गाजा में पाकिस्तान की भूमिका तय करने की तैयारी थी। पाकिस्तान चाहता है कि मुस्लिम देशों के साथ मिलकर वह अपनी सेना की साख को दोबारा बहाल करे और साथ ही अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को भी सहारा दे।

हालांकि, यह सब अभी शुरुआती दौर में है। सवाल यह है कि क्या इजरायल एक ऐसे देश की सेना को अपनी सीमा के पास बर्दाश्त करेगा, जिसके साथ उसके राजनयिक संबंध तक नहीं हैं? और क्या अमेरिका पाकिस्तान की इन भारी-भरकम शर्तों को मानेगा?

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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