नई दिल्ली, विशेष संवाददाता: देश के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आ रही है। अगर आप भी अपना छोटा बिजनेस चलाते हैं या स्टार्टअप शुरू करने की सोच रहे हैं, तो नीति आयोग की नई रिपोर्ट आपके काम की साबित हो सकती है। नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि सरकार को छोटे उद्योगों से जुड़ी अपनी तमाम योजनाओं को एक साथ जोड़ देना चाहिए। इससे न केवल कारोबारियों को फायदा होगा, बल्कि सरकारी संसाधनों की बर्बादी भी रुकेगी।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी सारी सुविधाएं
गुरुवार को जारी की गई नीति आयोग की रिपोर्ट ‘योजनाओं के एकीकरण के जरिए छोटे उद्योग क्षेत्र में बेहतर परिणाम’ में यह साफ कहा गया है कि वर्तमान में कई अलग-अलग मंत्रालय एक जैसे उद्देश्यों वाली योजनाएं चला रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय (MSME Ministry) अभी करीब 18 योजनाएं चला रहा है।
इन योजनाओं में लोन सहायता (Loan Support), स्किल डेवलपमेंट, मार्केटिंग, नई तकनीक और रिसर्च जैसे काम शामिल हैं। रिपोर्ट का कहना है कि क्योंकि ये योजनाएं बिखरी हुई हैं, इसलिए आम कारोबारी अक्सर उलझ जाता है और उसे सही समय पर सही लाभ नहीं मिल पाता। अगर इन सभी को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए, तो इनका असर कई गुना बढ़ जाएगा।
नीति आयोग की दो बड़ी सिफारिशें
नीति आयोग ने इस समस्या को सुलझाने के लिए दो मुख्य रास्ते सुझाए हैं:
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जानकारी का एकीकरण: सभी योजनाओं की जानकारी एक जगह हो ताकि किसी को भटकना न पड़े।
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आंकड़ों का मिलन: केंद्र और राज्य सरकारों के डेटा को आपस में जोड़ा जाए। इससे यह ट्रैक करना आसान होगा कि किस उद्योग को कितनी मदद मिली और कहां सुधार की जरूरत है।
क्यों जरूरी है ‘केंद्रीय पोर्टल’?
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा जोर एक ‘केंद्रीय पोर्टल’ (Central Portal) बनाने पर दिया गया है। सोचिए, अगर आपको लोन चाहिए, ट्रेनिंग लेनी हो या अपनी मशीनरी अपग्रेड करनी हो, और इन सबके लिए आपको अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने के बजाय सिर्फ एक वेबसाइट पर जाना पड़े, तो कितना समय बचेगा! नीति आयोग का मानना है कि इस पोर्टल से पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।
छोटे उद्योगों को क्या होगा फायदा?
वर्तमान में छोटे उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और जानकारी के अभाव में वे बड़े ब्रांड्स से मुकाबला नहीं कर पाते। नीति आयोग के इन सुझावों के लागू होने से:
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कारोबारियों को लोन मिलना आसान होगा।
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नई तकनीक और रिसर्च तक पहुंच बढ़ेगी।
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सरकारी पैसा सही जगह और सही व्यक्ति तक पहुंचेगा।
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निगरानी (Monitoring) बेहतर होगी, जिससे योजनाओं की कमियां दूर की जा सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इन सुझावों पर अमल करती है, तो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। अब देखना यह है कि मंत्रालय इन सिफारिशों को कितनी जल्दी जमीन पर उतारते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
