नेपाल में सियासी संकट: काठमांडू की सड़कों पर इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। बुधवार शाम तक नेपाली सेना मुख्यालय के बाहर नारेबाज़ी हो रही थी। अलग-अलग GenZ युवाओं के समूह caretaker प्रधानमंत्री के नाम पर बहस कर रहे थे।
भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ विद्रोह
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें पिछले हफ्ते शुरू हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी हैं। ‘हामी नेपाल’ और कई अन्य युवा संगठनों ने इसमें अहम भूमिका निभाई। मंगलवार को हिंसक हुए इन प्रदर्शनों में 30 लोगों की जान चली गई।
प्रधानमंत्री केपी ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दिया, जिसके बाद नेपाल पूरी तरह से सत्ता शून्य में है। सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अब नेपाली सेना ने संभाल ली है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने युवाओं से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है।
Discord पर हुई मैराथन चर्चा, सुझिला कार्की का नाम आगे
हज़ारों युवाओं ने बुधवार को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म Discord पर घंटों चली चर्चा के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुझिला कार्की को अंतरिम सरकार की अगुवाई के लिए चुना।
इस फैसले की जानकारी सेना प्रमुख अशोकराज सिग्देल को दी गई। हालांकि, वे कम से कम 12 अन्य समूहों से भी मिल रहे हैं, जो खुद को असली GenZ बता रहे हैं।
संसद पर हमला और देशभर में हिंसा
मंगलवार को हालात तब बिगड़े जब कुछ समूहों ने संसद (सिंह दरबार) और सुप्रीम कोर्ट भवन को आग के हवाले कर दिया। पार्टी दफ़्तरों, मीडिया, स्कूल और निजी मकानों पर भी हमले हुए। असली GenZ आंदोलनकारियों ने इन घटनाओं से दूरी बना ली।
संविधान में संक्रमणकाल का प्रावधान नहीं
पूर्व मानवाधिकार आयुक्त मोना अंसारी ने लिखा, “नेपाल के 2015 के संविधान में राजनीतिक शून्यता से निपटने का प्रावधान नहीं है। राष्ट्रपति अनुच्छेद 273 के तहत आपातकाल लागू कर सकते हैं।”
आपातकाल लागू होने पर संसद को एक महीने में इसे मंजूरी देनी होगी।
सुझिला कार्की को मिला समर्थन
काठमांडू के मेयर बालेन शाह और कई अन्य सार्वजनिक हस्तियों ने सुझिला कार्की के नाम का समर्थन किया है। वहीं, कुलमान घिसिंग और सुमना श्रेष्ठा जैसे नाम भी चर्चा में आए। सोशल मीडिया पोल्स में भी काफी लोग कार्की को अंतरिम नेतृत्व के लिए स्वीकार्य मान रहे हैं।
बटी हुई GenZ और सत्ता संघर्ष
हालांकि, GenZ आंदोलन एकजुट नहीं है। कई गुट सेना मुख्यालय के बाहर कार्की के नाम का विरोध कर रहे हैं।
इस बीच, विवादित नेता रवि लामिछाने को भी कुछ समर्थक प्रधानमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे, लेकिन युवाओं ने इस पर सहमति नहीं जताई।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक कृष्ण खनाल का कहना है कि हालात संविधान से बाहर निकल गए हैं। “ऐसा समाधान चाहिए जो संविधान के दायरे में रहे और जनता की आवाज़ को भी मान्यता दे।” कई विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रपति अनुच्छेद 76(5) के तहत संसद के किसी भी सदस्य को प्रधानमंत्री बना सकते हैं, जो 25 गैर-निर्वाचित मंत्रियों के साथ छह महीने तक चुनाव कराए।
नेपाल का 2015 का संविधान 10 साल की मशक्कत के बाद बना था। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर नया संविधान बनाने की मांग उठी तो देश सालों तक अस्थिरता में फंस जाएगा। फिलहाल, गुरुवार तक यह तय होना ज़रूरी है कि नेपाल को आगे ले जाने वाला अंतरिम नेतृत्व कौन होगा।
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