किसानों की मौज! अब बिना खाद-यूरिया के होगी ‘सोना’ उगलने वाली खेती, सरकार सीधे खाते में भेजेगी पैसे

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नई दिल्ली: अगर आप भी महंगी खाद और कीटनाशकों के खर्च से परेशान हैं, तो साल 2025 आपके लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। केंद्र सरकार ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) को मिशन मोड में लागू कर दिया है। अब सरकार न केवल आपको ‘जहर मुक्त’ खेती के गुर सिखाएगी, बल्कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को सीधे नकद प्रोत्साहन (Incentive) भी देगी।2 दिसंबर 2025 की इस सबसे बड़ी ट्रेंडिंग खबर ने गांव-गांव में हलचल मचा दी है।

 

क्या है सरकार का ‘4000 वाला’ प्लान?

सरकार ने इस मिशन के लिए ₹2,481 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।3 इस योजना की सबसे आकर्षक बात यह है कि जो किसान अपनी जमीन पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत करेंगे, उन्हें ट्रेनिंग और संसाधनों के लिए ₹4,000 प्रति एकड़ (अधिकतम एक एकड़ के लिए) की वित्तीय सहायता दी जाएगी।4 यह पैसा सीधे डीबीटी (DBT) के जरिए किसानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।

1 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

कृषि मंत्रालय के अनुसार, अगले एक साल में देश के 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार 15,000 क्लस्टर (समूह) बना रही है।5

 

मिट्टी की सेहत के लिए ‘पशु आधार’ और डिजिटल मैपिंग

सरकार ने खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी इससे जोड़ा है। नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन के तहत अब तक 35.9 करोड़ पशुओं को ‘पशु आधार’ दिया जा चुका है। प्राकृतिक खेती में गाय के गोबर और गौमूत्र का महत्व सबसे अधिक है, इसलिए पशुपालकों को भी इस मिशन से सीधा लाभ मिल रहा है।

रबी सीजन में रिकॉर्ड बुवाई का ट्रेंड

दिसंबर 2025 के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल रबी की फसलों (गेहूं, सरसों, चना) की बुवाई में पिछले साल के मुकाबले 8 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।7 कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट’ (मौसम की मार झेलने वाली) बीजों की नई किस्मों और सॉयल हेल्थ कार्ड के कारण किसानों का भरोसा बढ़ा है।

 

[Image: Satellite view of green farm lands with data overlays showing soil health]

2025 की बड़ी अपडेट्स एक नज़र में:

मुख्य विशेषता लाभ / विवरण
प्रोत्साहन राशि ₹4,000 प्रति एकड़ (प्राकृतिक खेती के लिए)
नया मिशन नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF)
टारगेट 1 करोड़ किसान और 7.5 लाख हेक्टेयर जमीन
मार्केट सपोर्ट रसायनों से मुक्त फसलों के लिए अलग राष्ट्रीय ब्रांड

 

भारत अब रसायनों वाली पुरानी खेती से निकलकर टिकाऊ और सुरक्षित ‘प्राकृतिक खेती’ की ओर बढ़ रहा है। सरकार की यह पहल न केवल खेती की लागत कम करेगी, बल्कि आम जनता को भी शुद्ध भोजन उपलब्ध कराएगी।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
    फिलहाल वे BigNews18.in पर हिंदी न्यूज़ लिखते हैं, जहां वे हर खबर को तेज़ी, सटीकता और संदर्भ के साथ पेश करते हैं।
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