नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अंतरिक्ष की गहराइयों में सालों तक चक्कर लगाने के बाद, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) का एक विशालकाय सैटलाइट बुधवार तड़के अनियंत्रित होकर पृथ्वी के वायुमंडल में समा गया। हैरानी की बात यह है कि इस सैटलाइट के गिरने की उम्मीद अभी से कई सालों बाद की थी, लेकिन यह समय से पहले ही वापस लौट आया। हालांकि नासा का कहना है कि सैटलाइट का ज्यादातर हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर खाक हो गया होगा, लेकिन इसके कुछ भारी पुर्जे जमीन या समुद्र तक पहुंच सकते हैं।
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आखिर कितना था खतरे का चांस?
नासा ने अपनी एक प्रेस रिलीज में बताया कि इस मलबे के किसी इंसान से टकराने या नुकसान पहुंचाने की आशंका बहुत ही कम थी। एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, इसकी संभावना 4,200 में से केवल 1 थी। हालांकि सुनने में यह संख्या बड़ी लग सकती है, लेकिन अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि यह पिछले कुछ सालों में हुई ऐसी ही घटनाओं की तुलना में काफी सुरक्षित है।
स्पेस-ट्रैकिंग कंपनी लियोलैब्स (LeoLabs) के डॉक्टर डैरेन मैकनाइट ने बताया, “हमने अतीत में ऐसी चीजें भी देखी हैं जिनके किसी से टकराने की आशंका 1,000 में 1 थी और तब भी कुछ नहीं हुआ। इसलिए 4,000 या 5,000 में 1 की संभावना होना कोई बहुत बड़ी चिंता की बात नहीं है।” इसकी तुलना अगर 2018 में चीन के स्पेस स्टेशन के गिरने से करें, तो उस समय खतरा 1 ट्रिलियन में 1 से भी कम था।
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क्या था इस सैटलाइट का मिशन?
धरती पर गिरने वाले इस 600 किलोग्राम वजनी सैटलाइट का नाम वैन एलेन प्रोब ए (Van Allen Probe A) था। नासा ने इसे 2012 में इसके जुड़वां सैटलाइट के साथ लॉन्च किया था। इनका मुख्य काम धरती के चारों ओर मौजूद ‘वैन एलेन रेडिएशन बेल्ट’ का अध्ययन करना था। ये बेल्ट्स अंतरिक्ष में उच्च-ऊर्जा कणों की दो पट्टियां होती हैं, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की वजह से टिकी रहती हैं।
कहां और कब गिरा यह सैटलाइट?
एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोनाथन मैकडॉवेल और अमेरिकी स्पेस फोर्स के आंकड़ों के अनुसार, यह प्रोब बुधवार सुबह करीब 6:37 बजे (ET) प्रशांत महासागर के ऊपर वायुमंडल में दाखिल हुआ। यह जगह मैक्सिको के दक्षिण और इक्वाडोर के पश्चिम में पड़ती है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि सैटलाइट का कोई हिस्सा जलने से बचा या नहीं, क्योंकि अभी तक किसी के घायल होने या मलबा देखे जाने की खबर नहीं मिली है।
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नासा के मुताबिक, ये रेडिएशन बेल्ट्स हमारे लिए बहुत जरूरी हैं क्योंकि ये हमें घातक सौर तूफानों और अंतरिक्ष विकिरण से बचाती हैं। वैन एलेन प्रोब ने अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण खोजें कीं, जिसमें एक तीसरी अस्थायी रेडिएशन बेल्ट का पता लगाना भी शामिल था।
समय से पहले क्यों लौटा सैटलाइट?
दिलचस्प बात यह है कि नासा ने पहले इस सैटलाइट के 2034 में वापस आने की भविष्यवाणी की थी। तो फिर यह 8 साल पहले ही क्यों गिर गया? इसका जवाब छिपा है सूरज की बढ़ती गतिविधियों में।
नासा ने बताया कि 2024 में सूरज अपने ‘सोलर मैक्सिमम’ (सबसे सक्रिय चरण) पर पहुंच गया। इस वजह से अंतरिक्ष का मौसम काफी बदल गया और पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में खिंचाव (Atmospheric Drag) बढ़ गया। इसी खिंचाव ने सैटलाइट को उसकी तय समय सीमा से बहुत पहले ही नीचे खींच लिया। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इसका दूसरा हिस्सा यानी ‘वैन एलेन प्रोब बी’ भी 2030 से पहले ही धरती पर गिर जाएगा।
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अंतरिक्ष के कचरे से बढ़ता खतरा
आजकल अंतरिक्ष में पुराने सैटलाइट्स और रॉकेट के टुकड़ों का जमावड़ा एक बड़ी समस्या बन गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हर हफ्ते कम से कम एक बड़ी वस्तु अंतरिक्ष से अनियंत्रित होकर धरती पर गिरती है। 2024 में फ्लोरिडा में एक घर की छत फाड़कर अंतरिक्ष स्टेशन का मलबा अंदर घुस गया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान इस खतरे की ओर खींचा।
स्पेस एक्सपर्ट मार्लन सोरगे का कहना है कि अब समय बदल गया है। आज सैटलाइट बनाने वाली कंपनियां इस बात का खास ख्याल रखती हैं कि मिशन खत्म होने के बाद सैटलाइट का कोई भी हिस्सा जमीन तक न पहुंचे और वह हवा में ही पूरी तरह जल जाए।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।








