Current date 22/03/2026

बिहार में नारा लोकेश की एंट्री: ‘एपी मॉडल’ का ज़ोर, राहुल गांधी पर तिखे वार

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बिहार में नारा लोकेश की एंट्री: ‘एपी मॉडल’ का ज़ोर, राहुल गांधी पर तिखे वार
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पटना में NDA उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित मीडिया मीट में आंध्र प्रदेश के मंत्री और टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने बिहार चुनाव की सियासी पिच गर्म कर दी। उन्होंने मंच से साफ कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, उसी तरह बिहार में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नितीश कुमार की जोड़ी विकास को रफ्तार दे सकती है। लोकेश ने NDA को “स्वच्छ और पारदर्शी शासन” का विकल्प बताते हुए जनता से गठबंधन को दोबारा जिताने की अपील की।

हाइलाइट्स

  • बिहार चुनाव प्रचार में आंध्र प्रदेश के मंत्री व टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश की भागीदारी
  • ‘एपी मॉडल’ के जरिए विकास का ब्लूप्रिंट पेश, NDA को वोट देने की अपील
  • राहुल गांधी पर वोटर लिस्ट और ‘SIR’ को लेकर दोहरे रुख के आरोप

लोकेश ने अपने संबोधन में बार-बार ‘एपी मॉडल’ का जिक्र किया। उनके मुताबिक आंध्र प्रदेश सरकार “हर परिवार में एक उद्यमी” के विज़न पर काम कर रही है—यानी लोगों को नौकरी के इंतज़ार में रखने के बजाय उन्हें कारोबार के लिए सक्षम बनाना। उन्होंने दावा किया कि यह दृष्टि दीर्घकालिक विकास को गति देती है, जबकि “हर परिवार से एक को सरकारी नौकरी” जैसी घोषणाएं ज़मीन पर टिकाऊ नहीं होतीं। लोकेश ने बिहार के मतदाताओं से आग्रह किया कि वे वायदों और कामों के बीच फर्क समझकर वोट करें।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए नारा लोकेश ने कहा कि वोट चोरी के आरोप लगाने के साथ-साथ वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को सुधारने के लिए शुरू किए गए ‘SIR’ (Special initiative/Revision जैसा सुधार अभियान) का विरोध करना दोहरे रुख को दिखाता है। उनके अनुसार, अगर किसी प्रक्रिया पर आपत्ति है तो उसी सुधारात्मक पहल का समर्थन होना चाहिए जो त्रुटियों को ठीक करे। लोकेश ने तंज किया कि वोटर लिस्ट की अहमियत हर राजनीतिक दल समझता है, “राहुल गांधी को इसकी परवाह अब समझ आ रही है, यह हैरान करने वाला है।” उन्होंने कहा कि एक ही वक्त में दो अलग-अलग तर्क लेना सही नहीं, किसी एक रुख पर टिकना चाहिए।

NDA के पक्ष में माहौल बनाते हुए लोकेश ने केंद्र-राज्य तालमेल के फायदे गिनाए। उनके मुताबिक, गठबंधन सरकार बनने पर केंद्रीय बजट से राज्यों को अधिक संसाधन मिलते हैं, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा संस्थानों को सीधी मजबूती मिलती है। साथ ही, उद्योग निवेश को बढ़ावा देने में केंद्र की नीतियां सहायक होती हैं, और कानून-व्यवस्था मजबूत होने पर विकास की रफ्तार स्वतः तेज़ होती है। उन्होंने आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जनता ने परिवर्तन के पक्ष में वोट किया और NDA सरकार ने “94% स्ट्राइक रेट” के साथ जीत दर्ज की। लोकेश के शब्दों में, डबल-इंजन सरकार विकास को “फास्ट-ट्रैक” पर डाल देती है।

लोकेश ने बिहार के मतदाताओं से कहा कि आने वाले साल राज्य के लिए निर्णायक हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी-नीतीश नेतृत्व में बिहार हर क्षेत्र—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और रोज़गार—में बेहतर नतीजे दे सकता है। उनकी दलील थी कि जब नीति-निर्माण में विज़न और दक्षता साथ चलते हैं, तब योजनाएं कागज़ से निकलकर ज़मीन पर उतरती हैं। आंध्र प्रदेश में नीति-स्तर पर हुए बदलावों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार भी उद्यमिता-केंद्रित सोच अपनाए तो निजी निवेश और स्थानीय रोजगार बढ़ेंगे।

अंत में, लोकेश ने जनता से अपील की कि वे विकास-आधारित राजनीति को प्राथमिकता दें, भ्रमित करने वाले वादों से दूर रहें और NDA उम्मीदवारों को जिताकर बिहार को स्थिर एवं स्वच्छ शासन दें। उनके मुताबिक, यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि बिहार के अगले विकास-दशक की दिशा तय करने का मौका है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • Nalini Mishra

    नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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नलिनी मिश्रा

नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञतानलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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