सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी (Syed Mushtaq Ali Trophy) में झारखंड की टीम ने इस बार वो कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इशान किशन की कप्तानी में झारखंड ने खिताबी जीत हासिल कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस जीत के पीछे एक ऐसा ‘मास्टरमाइंड’ था जो खुद मैदान पर तो नहीं था, पर उसकी नजर हर गेंद पर थी? जी हां, हम बात कर रहे हैं टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और ‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की।
झारखंड की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अनुभवी स्पिनर शाहबाज नदीम ने बड़ा खुलासा किया है कि कैसे धोनी ने पर्दे के पीछे से इस टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई।
धोनी ने हर मैच पर रखी ‘चील’ जैसी नजर
शाहबाज नदीम ने ईएसपीएनक्रिकइंफो (ESPNcricinfo) से बातचीत में बताया कि भले ही धोनी टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन वे हर पल टीम के साथ जुड़े रहे। नदीम ने कहा, “धोनी ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का हर एक मैच काफी करीब से देखा है। उन्हें टीम की एक-एक कमजोरी और मजबूती के बारे में पता है। वे झारखंड के हर खिलाड़ी के आंकड़ों और प्रदर्शन पर नजर रखते हैं।”
नदीम के मुताबिक, धोनी का झारखंड क्रिकेट को आगे ले जाने का जज्बा ही था कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम से संपर्क बनाए रखा।
कोचिंग स्टाफ से लेकर फैसलों तक, सब ‘माही’ के हाथ
हैरानी की बात यह है कि धोनी सिर्फ सलाह ही नहीं दे रहे थे, बल्कि टीम के गठन में भी उनका बड़ा हाथ था। नदीम ने खुलासा किया कि सीजन की शुरुआत में कोचिंग स्टाफ की नियुक्ति से लेकर बाकी अहम पूछताछ तक धोनी खुद कर रहे थे। उन्होंने कहा, “टीम में लिए जाने वाले सभी अहम फैसले धोनी से पूछकर ही फाइनल किए जाते थे। वे टीम की छोटी-से-छोटी बारीकियों में दिलचस्पी लेते हैं, जो खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए काफी है।”
इशान किशन और धोनी की ‘जुगलबंदी’
टूर्नामेंट में इशान किशन ने टीम की कप्तानी शानदार तरीके से की, लेकिन उन्हें बैकग्राउंड से धोनी का गाइडेंस मिलता रहा। इशान के अलावा कुमार कुशाग्र और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ियों ने भी टीम की जीत में जान फूँक दी। झारखंड ने 11 मैचों में से 10 में जीत दर्ज की, जो उनकी डोमिनेशन को दर्शाता है। इस सफर में उन्होंने दिल्ली, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसी दिग्गज टीमों को धूल चटाई। कर्नाटक के खिलाफ मिली रोमांचक जीत ने तो टूर्नामेंट का पासा ही पलट दिया था।
झारखंड क्रिकेट के लिए वरदान हैं धोनी
इतना बड़ा खिलाड़ी जब घरेलू टीम पर इतना ध्यान दे, तो टीम का कायापलट होना निश्चित है। धोनी का मकसद सिर्फ जीत नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं को उस मुकाम तक पहुँचाना है जहाँ वे टीम इंडिया का दरवाजा खटखटा सकें। नदीम कहते हैं, “हमें बहुत अच्छा लगता है जब माही भाई जैसा दिग्गज हमारे खेल पर इतनी बारीकी से ध्यान देता है।”
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