Mexico-मेक्सिको ने भारत, चीन, थाईलैंड और इंडोनेशिया समेत कई एशियाई देशों के लिए अपना बाजार अचानक महंगा कर दिया है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबॉम ने घोषणा की कि जिन देशों के साथ मेक्सिको का फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) नहीं है, उन पर अब 50 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाया जाएगा। यह फैसला ना सिर्फ कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के निर्यात क्षेत्र, खासकर ऑटो सेक्टर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्यों बढ़ाया गया टैरिफ़?
राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबॉम ने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय रोजगार के अवसर मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उनका दावा है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा था, जिसे कम करने के लिए अधिक टैरिफ की जरूरत थी।
इस कदम का सीधा मतलब है कि जिन देशों के साथ FTA नहीं है, उनके उत्पाद मेक्सिको में अब पहले से कहीं अधिक महंगे पड़ेंगे। इसमें भारत भी शामिल है।
भारत समेत कई एशियाई देशों पर असर
मेक्सिको एशियाई देशों के लिए खासा बड़ा निर्यात बाजार है। टैरिफ़ बढ़ने के बाद भारत, चीन, थाईलैंड और इंडोनेशिया के कई उत्पादों की कीमतें मेक्सिको में बढ़ जाएंगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है।
सबसे तगड़ा असर ऑटो उद्योग पर होने की आशंका है। भारत से मेक्सिको को बड़े स्तर पर कारों का निर्यात होता है, और यही क्षेत्र इस नए टैरिफ़ झटके की सीधी मार झेल सकता है।
ऑटो सेक्टर को तगड़ा झटका
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मेक्सिको के इस फैसले से भारत में काम कर रही फॉक्सवैगन और ह्यूंदै जैसी कंपनियों के करीब नौ हजार करोड़ रुपये के कार निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है।
अब तक भारत से मेक्सिको को जाने वाली कारों पर लगभग 20 प्रतिशत ड्यूटी लगती थी, लेकिन यह दर बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगी। इस बढ़ोतरी के कारण:
- कारें मेक्सिको के बाजार में काफी महंगी हो जाएंगी
- कंपनियों के लिए वहां अपनी पकड़ बनाए रखना मुश्किल हो सकता है
- निर्यात की मात्रा घटने का खतरा बढ़ जाएगा
विशेषज्ञों का अनुमान है कि मारुति सुजुकी और निसान जैसी कंपनियां भी इस बदलाव से प्रभावित होंगी, क्योंकि ये सभी मेक्सिको को बड़ी संख्या में वाहन भेजती हैं।
भारत से निर्यात करने वाली कंपनियां ज्यादा प्रभावित
भारत से मेक्सिको को सबसे ज्यादा कार निर्यात करने वाली कंपनियों में फॉक्सवैगन, ह्यूंदै, निसान और मारुति सुजुकी शामिल हैं। भारत इन कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग और कार असेंबलिंग का एक बड़ा केंद्र है। मेक्सिको जैसे महत्वपूर्ण बाजार में टैरिफ़ के बढ़ने से इनके निर्यात मॉडल पर सीधा असर होगा।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियों को नई रणनीतियाँ बनानी पड़ सकती हैं, जिसमें निर्यात रूट बदलना, कीमतों में पुनर्गठन या मेक्सिको में लोकल मैन्युफैक्चरिंग जैसी संभावनाएँ शामिल हैं।
मेक्सिको का यह निर्णय वैश्विक व्यापार पर भी व्यापक असर डाल सकता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे टैरिफ बढ़ाने से व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है, खासकर उन देशों के साथ जिनके साथ अभी तक कोई FTA नहीं है।
भारत के संदर्भ में ऑटो सेक्टर पर इसका तात्कालिक असर तो दिख रहा है, लेकिन आने वाले महीनों में अन्य क्षेत्रों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
भारत सरकार और प्रभावित कंपनियों की ओर से अभी इस पर कोई बड़ा बयान नहीं आया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले पर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें हो सकती हैं।
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