दुनिया भर में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए पिछले 60 वर्षों से इस्तेमाल की जा रही दवा ‘मेटफॉर्मिन’ (Metformin) को लेकर वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। अब तक चिकित्सा जगत में यह माना जाता था कि यह दवा मुख्य रूप से लीवर और पेट (gut) के जरिए खून में शुगर के स्तर को नियंत्रित करती है। हालांकि, एक ताजा शोध ने इस पुरानी धारणा को चुनौती देते हुए बताया है कि इस दवा का एक बड़ा हिस्सा सीधे हमारे मस्तिष्क पर काम करता है।
अमेरिका के बेयलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन (Baylor College of Medicine) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि मेटफॉर्मिन मस्तिष्क के एक विशिष्ट हिस्से के जरिए ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। ‘साइंस एडवांसेज’ (Science Advances) जर्नल में प्रकाशित यह जानकारी भविष्य में डायबिटीज के अधिक सटीक और प्रभावी उपचार विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
मस्तिष्क के जरिए कैसे काम करती है दवा?
अध्ययन के अनुसार, मेटफॉर्मिन मस्तिष्क के ‘वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस’ (VMH) नामक क्षेत्र में सक्रिय होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह दवा VMH में मौजूद एक विशेष प्रोटीन ‘Rap1’ को निष्क्रिय (turn off) कर देती है। जब यह प्रोटीन निष्क्रिय होता है, तो वहां मौजूद ‘SF1 न्यूरॉन्स’ कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं। यही कोशिकाएं शरीर में ग्लूकोज के संतुलन और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बेयलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर और पैथोफिजियोलॉजिस्ट माकोतो फुकुडा (Makoto Fukuda) ने बताया, “यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया था कि मेटफॉर्मिन लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करके काम करती है। कुछ शोधों ने इसे पेट से भी जोड़कर देखा था। लेकिन हमने मस्तिष्क की जांच की क्योंकि इसे पूरे शरीर के ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म का मुख्य नियामक माना जाता है।” फुकुडा के अनुसार, शोध में यह भी सामने आया कि लीवर और आंतों को इस दवा पर प्रतिक्रिया देने के लिए इसकी भारी मात्रा की जरूरत होती है, जबकि दिमाग दवा की बहुत कम मात्रा पर भी सक्रिय हो जाता है।
चूहों पर किए गए परीक्षण से मिली सफलता
वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत की पुष्टि के लिए चूहों पर प्रयोग किए। शोध के दौरान जब चूहों के दिमाग में सीधे मेटफॉर्मिन के इंजेक्शन दिए गए, तो उनके ब्लड शुगर लेवल में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, जब वैज्ञानिकों ने ऐसे चूहे विकसित किए जिनमें ‘Rap1’ प्रोटीन नहीं था, तो उन पर मेटफॉर्मिन का कोई असर नहीं हुआ। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि मेटफॉर्मिन मस्तिष्क के इसी खास रास्ते (pathway) के जरिए अपना काम करती है।
यहाँ एक अहम पहलू यह है कि मेटफॉर्मिन को अब ‘जेरोथेराप्यूटिक’ (gerotherapeutic) दवा के रूप में भी देखा जा रहा है। इसका मतलब है कि यह दवा न केवल डायबिटीज को नियंत्रित करती है, बल्कि शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने की क्षमता रखती है। पिछले कुछ शोधों में इसे डीएनए क्षति को सीमित करने और दीर्घायु से जुड़े जीन की सक्रियता बढ़ाने से भी जोड़ा गया है।
60 साल पुराना रहस्य
मेटफॉर्मिन का इतिहास छह दशकों से भी अधिक पुराना है। यह अपनी सुरक्षा, कम लागत और प्रभावशीलता के कारण दुनिया भर में डायबिटीज के मरीजों की पहली पसंद रही है। दशकों से डॉक्टर इसे इस आधार पर लिखते आए हैं कि यह लीवर द्वारा ग्लूकोज के उत्पादन को कम करती है और शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है।
वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात को लेकर हैरान थे कि मेटफॉर्मिन के कुछ अन्य प्रभाव, जैसे वजन कम होना और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, केवल लीवर पर असर डालने से कैसे संभव हैं। हालिया शोध ने दिमाग और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म के बीच के इस सीधे संबंध को उजागर करके इस 60 साल पुरानी वैज्ञानिक गुत्थी को लगभग सुलझा लिया है।
भविष्य की संभावनाएं
इस खोज ने उन दावों को भी मजबूती दी है जिनमें मेटफॉर्मिन को ‘एंटी-एजिंग’ और मस्तिष्क की सेहत के लिए फायदेमंद बताया जाता रहा है। कुछ पुराने अध्ययनों के अनुसार, मेटफॉर्मिन लेने वाले मरीजों में ‘लॉन्ग कोविड’ का खतरा कम देखा गया है और बुजुर्ग महिलाओं में लंबी उम्र (90 वर्ष से अधिक) की संभावना 30 प्रतिशत तक बढ़ी है।
माकोतो फुकुडा ने कहा, “यह खोज मेटफॉर्मिन के बारे में हमारी सोच को पूरी तरह बदल देती है। अब हम इस दिशा में काम करेंगे कि क्या मस्तिष्क में सक्रिय यही Rap1 सिग्नलिंग पाथवे इस दवा के अन्य लाभों, जैसे दिमाग को बूढ़ा होने से बचाने के लिए भी जिम्मेदार है।” शोधकर्ताओं का लक्ष्य अब ऐसे उपचार तैयार करना है जो सीधे मस्तिष्क के इन न्यूरॉन्स को लक्षित कर सकें, जिससे भविष्य में डायबिटीज प्रबंधन और भी सुरक्षित हो सके।
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