प्रयागराज: आस्था, विश्वास और भक्ति का महापर्व मकर संक्रांति आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। तीर्थराज प्रयाग की पावन धरती पर सुबह से ही भक्तों का ऐसा रेला उमड़ा है कि चारों तरफ बस ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। संगम के तट पर ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हुआ स्नान का सिलसिला अभी भी जारी है, जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाकर निहाल हो रहे हैं।
कड़ाके की ठंड और कोहरा, फिर भी अडिग श्रद्धा
पिछले कुछ दिनों से प्रयागराज में धूप खिल रही थी, लेकिन आज मकर संक्रांति के खास मौके पर मौसम ने अचानक करवट ले ली। भोर होते ही पूरा मेला क्षेत्र घने कोहरे की चादर में लिपट गया और शीत लहर चलने लगी। हालांकि, मौसम की इस बेरुखी का श्रद्धालुओं के उत्साह पर कोई असर नहीं दिखा। रात 3 बजे से ही लोग नंगे पांव संगम की ओर बढ़ते देखे गए। बुजुर्ग हों, बच्चे हों या महिलाएं, सभी इस ठंड को मात देकर गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं।
संगम तट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। संगम नोज पर खुद मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा मौजूद रहकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
प्रशासनिक टीम लगातार माइक के जरिए श्रद्धालुओं से अपील कर रही है कि वे स्नान के बाद जल्द से जल्द घाट खाली करें ताकि दूसरे भक्तों को जगह मिल सके। सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए पुलिस के साथ-साथ RAF के जवान, घुड़सवार पुलिस और नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयंसेवक भी तैनात हैं। घाटों पर अनावश्यक भीड़ जमा न हो, इसके लिए सीटियां बजाकर लोगों को निर्देशित किया जा रहा है।
कल्पवासियों और साधु-संतों का जमावड़ा
माघ मेले के इस प्रमुख स्नान पर्व पर सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से आए साधु-संत, कल्पवासी और नागा संन्यासी भी भारी संख्या में पहुंचे हैं। मंडलायुक्त के मुताबिक, अब तक लाखों लोग पवित्र स्नान कर चुके हैं और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मकर संक्रांति पर संगम में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
आस्था के आगे सब फेल
सुबह 7 बजे तक कोहरा थोड़ा कम जरूर हुआ, लेकिन ठिठुरन अभी भी बनी हुई है। बावजूद इसके, संगम की रेती पर भक्ति का रंग चढ़ा हुआ है। भक्तों का रेला यह बता रहा है कि जब बात आस्था की हो, तो मौसम की चुनौतियां छोटी पड़ जाती हैं।
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