कोंकण में ‘कैश फॉर वोट’ का धमाका! बीजेपी पदाधिकारियों की कार से नोटों की गड्डियां, शिंदे सेना भड़क उठी

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महाराष्ट्र के कोंकण में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच ‘कैश फॉर वोट’ के आरोपों ने राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। मालवन में बीजेपी के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के वाहनों से संदिग्ध कैश मिलने के बाद से पूरा कोंकण सियासी हलचल में है। चुनाव प्रचार खत्म होते ही सामने आया यह मामला अब महायुति सरकार के दो सहयोगियों—बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना—को आमने-सामने खड़ा कर रहा है।

घटना की शुरुआत तब हुई जब मालवन के एक पुलिस चौकी पर चेकिंग के दौरान बीजेपी देवगढ़ तालुका अध्यक्ष महेश नारकर और मालवन अध्यक्ष बाबा परब के वाहनों से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की सूचना सामने आई। बताया जा रहा है कि यह कैश उस समय मिला जब क्षेत्र में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों का प्रचार कार्य अभी-अभी खत्म हुआ था। इस टाइमिंग ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है।

चेकिंग के दौरान पुलिस ने नारकर की गाड़ी को तुरंत कब्जे में लेकर आगे की जांच के लिए मालवन पुलिस स्टेशन भेज दिया। जैसे ही यह खबर फैली, कोंकण की राजनीति में हलचल मच गई। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय राजनीति तक, हर जगह सवाल उठने लगे कि आखिर चुनाव के एक दिन पहले इतनी बड़ी रकम किस मकसद से लाई जा रही थी?

मामला तब और गरमाया जब शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक नीलेश राणे को जानकारी मिली कि कथित तौर पर कुछ लोग मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इस खबर ने राणे को भड़का दिया और वह सीधे मालवन पुलिस स्टेशन पहुंच गए। वहां पहुंचकर राणे ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक इस मामले पर औपचारिक FIR दर्ज नहीं की जाती, वह पुलिस स्टेशन से बाहर कदम नहीं रखेंगे।

नीलेश राणे के इस आक्रामक तेवर के बाद पुलिस स्टेशन के बाहर राजनीतिक समर्थकों की भीड़ जमा होने लगी। माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता गया और पुलिस को हालात संभालने के लिए अतिरिक्त बल की व्यवस्था करनी पड़ी। राणे का कहना है कि चुनाव के दौरान अवैध कैश मिलने की घटनाएं लोकतंत्र को कमजोर करती हैं और ऐसे मामलों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने मांग की है कि कैश की पूरी जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि वह किस उद्देश्य से लाया जा रहा था। दूसरी ओर बीजेपी पदाधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे सवाल और गहराते जा रहे हैं। कई विपक्षी नेता भी खुलकर कह रहे हैं कि चुनाव से ठीक पहले कैश मिलने का सीधा मतलब “वोट खरीदने की कोशिश” हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोंकण जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह का विवाद माहौल को और ज्यादा गर्मा सकता है। खासकर तब, जब राज्य में गठबंधन सहयोगियों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर खींचतान चल रही है। यह मामला महायुति की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला चुका है।

वहीं स्थानीय मतदाता भी इस घटनाक्रम से नाराज दिख रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि हर चुनाव में ‘कैश फॉर वोट’ जैसे आरोप लगते हैं, लेकिन कार्रवाई बेहद कम होती है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार कार्रवाई सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देगी।

फिलहाल पुलिस ने कैश जब्त कर लिया है और जांच जारी है। नीलेश राणे के दबाव के बाद पुलिस पर भी तेजी से FIR दर्ज करने का दबाव बढ़ गया है। आने वाले घंटों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि मामला सीधे सत्ता पक्ष की पार्टियों को टकराव में ला चुका है। कोंकण की राजनीति में उठी यह हलचल अब पूरे महाराष्ट्र की सियासत को हिला रही है।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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