हमारी किडनी शरीर के उस ‘वॉटर प्यूरीफायर’ की तरह है, जो खून से गंदगी को छानकर बाहर निकालती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब यह नाजुक अंग बीमार पड़ता है, तो इसके सबसे पहले संकेत आपके चेहरे या पेट पर नहीं, बल्कि आपके हाथों और पैरों पर दिखाई देते हैं? अक्सर हम पैरों की सूजन या मांसपेशियों के दर्द को थकान समझकर टाल देते हैं, लेकिन यही लापरवाही भारी पड़ सकती है।
आज के इस दौर में खराब लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से किडनी की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। किडनी न केवल शरीर से टॉक्सिन्स (गंदगी) को बाहर निकालती है, बल्कि यह शरीर में पानी, नमक और जरूरी मिनरल्स जैसे पोटेशियम और कैल्शियम का बैलेंस भी बनाए रखती है। इतना ही नहीं, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और खून बनाने वाले हार्मोन बनाने में भी किडनी का बड़ा रोल होता है।
अगर आपकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, तो शरीर में गंदगी और पानी जमा होने लगता है। आइए जानते हैं वे 5 बड़े संकेत जो बताते हैं कि आपकी किडनी खतरे में है।
1. हाथ, पैर और टखनों में सूजन (Swelling)
किडनी डैमेज होने का सबसे आम और शुरुआती लक्षण है पैरों और टखनों (Ankles) में सूजन आना। जब किडनी शरीर से एक्स्ट्रा सोडियम और पानी को बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह ऊतकों में जमा होने लगता है। अगर आप सूजी हुई जगह को उंगली से दबाते हैं और वहां गड्ढा बन जाता है, तो समझ लीजिए कि यह सामान्य सूजन नहीं बल्कि ‘वॉटर रिटेंशन’ है। इसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
2. मांसपेशियों में खिंचाव और ऐंठन (Cramps)
क्या आपको अचानक पैरों की मांसपेशियों में तेज दर्द या ऐंठन महसूस होती है? किडनी फेल होने की स्थिति में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे कैल्शियम और फास्फोरस) का संतुलन बिगड़ जाता है। जब खून में इन मिनरल्स की कमी या अधिकता होती है, तो पैरों की नसों में तेज खिंचाव और दर्द होने लगता है।
3. त्वचा में खुजली और सूखापन (Dry and Itchy Skin)
जब किडनी खून को साफ नहीं कर पाती, तो टॉक्सिन्स यानी जहरीले तत्व खून में ही रह जाते हैं। ये अशुद्धियां धीरे-धीरे त्वचा के नीचे जमा होने लगती हैं। इसके कारण हाथों और पैरों में असहनीय खुजली, चकत्ते (Rashes) और बहुत ज्यादा सूखापन महसूस हो सकता है। अगर मॉइस्चराइजर लगाने के बाद भी खुजली कम न हो, तो यह किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।
4. हाथों-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन (Numbness)
किडनी का सीधा असर हमारे नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर भी पड़ता है। मेडिकल भाषा में इसे ‘पेरिफेरल न्यूरोपैथी’ कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को अपने हाथों और पैरों में चींटियां चलने जैसी झुनझुनी महसूस होती है या कभी-कभी हाथ-पैर पूरी तरह सुन्न पड़ जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि किडनी की खराबी अब नसों को नुकसान पहुंचा रही है।
5. पैरों में दर्द और कमजोरी (Leg Pain & Weakness)
किडनी फेलियर की वजह से शरीर में जमा होने वाले टॉक्सिन्स मांसपेशियों और हड्डियों को कमजोर कर देते हैं। इससे पैरों में लगातार दर्द बना रहता है और सीढ़ियां चढ़ने या चलने-फिरने में कमजोरी महसूस होती है। अगर आपको बिना किसी भारी काम के पैरों में भारीपन या दर्द महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
किडनी की बीमारी को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत मामूली लगते हैं। लेकिन अगर समय रहते जांच करवा ली जाए, तो किडनी को पूरी तरह खराब होने से बचाया जा सकता है। अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से एक भी महसूस हो रहा है, तो तुरंत किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) करवाएं।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
