बॉलीवुड के सबसे चर्चित फिल्म मेकर्स में से एक करण जौहर (Karan Johar) अक्सर अपनी फिल्मों, सितारों के साथ अपने रिश्तों और बेबाक बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन इस बार करण ने खुद को लेकर एक ऐसी बात कही है जिसे सुनकर उनके फैंस हैरान हैं। करण जौहर का मानना है कि उनके करियर का सबसे सुनहरा दौर यानी ‘पीक’ (Peak) तब आया था जब वह महज 28 साल के थे। उनके मुताबिक, उस समय के बाद से वह आज तक उस ऊंचाई को दोबारा नहीं छू पाए हैं।
आखिर ऐसा क्या हुआ था 28 साल की उम्र में? क्यों करण को लगता है कि ‘कभी खुशी कभी गम’ (Kabhi Khushi Kabhie Gham) के बाद उनका ग्राफ नीचे गिरा या स्थिर हो गया? आइए जानते हैं इस दिलचस्प किस्से के बारे में।
28 की उम्र और वो दो महाशक्तियां
हाल ही में ‘मान्यवर’ के यूट्यूब चैनल पर एक बातचीत के दौरान करण जौहर ने अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि साल 2001 में जब वह अपनी दूसरी फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ बना रहे थे, तब उनकी उम्र केवल 28 साल थी। इसी दौरान उन्हें भारतीय सिनेमा के दो सबसे बड़े दिग्गजों— महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और सुरों की मलिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)— के साथ काम करने का मौका मिला।
करण ने कहा, “मेरे साथ दो ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने मुझे झकझोर कर रख दिया। पहली बार जब मैंने मिस्टर बच्चन को डायरेक्ट किया और दूसरी बार जब लता जी ने मेरी फिल्म के लिए गाना गाया। यह सब मेरी दूसरी फिल्म के दौरान हो रहा था। मुझे लगा कि मेरा पूरा बचपन मेरी आंखों के सामने साकार हो रहा है।”
“मुझे लगा मैं इससे आगे कभी नहीं जा पाऊंगा”
करण जौहर ने बहुत ही ईमानदारी से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि यही उनके करियर की ऊंचाई है। उन्होंने साझा किया, “मैंने सोचा कि मैं इससे ऊपर और क्या देख सकता हूं? और सच कहूं तो मुझे आज भी लगता है कि मैं उस स्तर से आगे नहीं जा पाया हूं। मुझे लगता है कि मैं 28 साल की उम्र में ही अपने करियर के शिखर (Peak) पर पहुंच गया था।”
एक फिल्म मेकर के लिए यह स्वीकार करना कि उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि दो दशक पहले ही आ चुकी थी, काफी बड़ी बात है। लेकिन करण के लिए अमिताभ बच्चन को निर्देश देना और लता जी की आवाज को अपनी फिल्म में शामिल करना किसी सपने के सच होने जैसा था।
जब स्टूडियो में फूट-फूट कर रोने लगे करण
लता मंगेशकर के साथ काम करने का अनुभव करण के लिए बहुत भावुक था। उन्होंने बताया कि जब लता जी फिल्म का टाइटल ट्रैक ‘कभी खुशी कभी गम’ रिकॉर्ड कर रही थीं, तो वह रिकॉर्डिंग कंसोल के पास बैठकर रो रहे थे। करण ने कहा, “मैं रो रहा था क्योंकि मैं बचपन से ही उनके प्रति जुनूनी था। उनका गायन मेरे लिए किसी इबादत जैसा था। उन्हें लाइव गाते देखना और अपनी फिल्म के लिए गाते सुनना एक ऐसा एहसास था जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”
अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करने में छूट गए थे पसीने
करण ने यह भी बताया कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करना उनके लिए कितना तनावपूर्ण था। आज भी करण जब भी बिग बी से मिलते हैं, तो उनके पैर छूते हैं। उस दौर को याद करते हुए करण ने कहा, “जिस दिन मुझे उन्हें डायरेक्ट करना था, तनाव के मारे मेरी तबीयत खराब हो गई थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अमिताभ बच्चन को क्या बोलूं? मैं कौन होता हूं उन्हें यह बताने वाला कि क्या करना है? मन में बस यही आता था कि सर, आप जो कर रहे हैं वही सही है, बस करते जाइए।”
एक यादगार सफर
‘कभी खुशी कभी गम’ भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि पारिवारिक ड्रामा शैली को एक नई पहचान दी। करण जौहर के लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक इमोशनल सफर था जिसने उन्हें एक फिल्म मेकर के तौर पर स्थापित किया।
आज करण जौहर भले ही इंडस्ट्री के सबसे पावरफुल लोगों में गिने जाते हों, लेकिन उनके दिल के करीब आज भी वही 28 साल वाला दौर है। उनका यह बयान दिखाता है कि सफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, महान कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव एक कलाकार के लिए हमेशा सबसे अनमोल रहता है।
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